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नरोदड़ा में 600 साल पुरानी ‘दूध की कार’ परंपरा निभाई:21 युवाओं ने गांव की सुख-समृद्धि के लिए लगाई परिक्रमा, लोकदेवता गोगाजी का पूजन किया


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नरोदड़ा में 600 साल पुरानी ‘दूध की कार’ परंपरा निभाई:21 युवाओं ने गांव की सुख-समृद्धि के लिए लगाई परिक्रमा, लोकदेवता गोगाजी का पूजन किया

नरोदड़ा में 600 साल पुरानी 'दूध की कार' परंपरा निभाई:21 युवाओं ने गांव की सुख-समृद्धि के लिए लगाई परिक्रमा, लोकदेवता गोगाजी का पूजन किया

लक्ष्मणगढ़ : लक्ष्मणगढ़ उपखंड का नरोदड़ा गांव अपनी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकजुटता के लिए जाना जाता है। रविवार को यहां राष्ट्र की सुख-समृद्धि, अच्छी बारिश और जनकल्याण की कामना को लेकर गोगाजी महाराज की ‘दूध की कार’ लगाई गई। 21 युवाओं की एक टोली ने पूरे गांव की परिक्रमा करते हुए 16 कोस के कांकड़ में यह कार लगाई और सभी प्रमुख देवस्थानों पर ध्वज चढ़ाए।

ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा गांव की स्थापना के समय से चली आ रही है। जनश्रुति है कि बैसाख सुदी दूज, संवत 1421 में नरोदड़ा गांव की स्थापना हुई थी, और तभी से गोगाजी महाराज की यह ‘कार’ देने की परंपरा आज तक जारी है।

गांव में है 400 कुएं

धार्मिक आस्था के साथ ही, नरोदड़ा गांव कृषि और जल संरक्षण के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान रखता है। लगभग 1400 हेक्टेयर क्षेत्रफल और करीब 400 कुओं वाले इस गांव में अत्यधिक भूजल दोहन के बावजूद पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण किया जा रहा है, जिसके कारण यहां प्याज और गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर होती है।

सेवानिवृत्त बिजलीकर्मी बीरबल ख्यालिया और परमाराम ख्यालिया के नेतृत्व में निकली इस ‘कार’ को गोगामेड़ी के पुजारी गणेशराम कोटवाल तथा गांव के उद्गम स्थल बाबा लक्ष्मणदास मंदिर के पुजारी प्रमोद शर्मा ने गोगा ध्वज दिखाकर रवाना किया। कार सेवकों के लिए दूध की व्यवस्था सेवानिवृत्त थानेदार रामकुमार सिंह ख्यालिया ने करवाई। इस कार सेवा में महेंद्र सिंह, प्रकाश ख्यालिया, महादेव, अशोक ग्रामसेवक, महेंद्र सिंह थोरी, रमेश ख्यालिया, अंकित कुमार, विकास, संजीव, महेंद्र, ताराचंद, जगदीश, प्रदीप (पप्पू), नवीन, प्रिंस, आकाश सहित 21 युवाओं ने भाग लिया।

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