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चिड़ावा के अडूकिया स्कूल में प्रधानाचार्य के ट्रांसफर पर हंगामा:अभिभावकों ने स्कूल पर ताला लगाया, नए प्रधानाचार्य ने समझाइश की


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चिड़ावा के अडूकिया स्कूल में प्रधानाचार्य के ट्रांसफर पर हंगामा:अभिभावकों ने स्कूल पर ताला लगाया, नए प्रधानाचार्य ने समझाइश की

चिड़ावा के अडूकिया स्कूल में प्रधानाचार्य के ट्रांसफर पर हंगामा:अभिभावकों ने स्कूल पर ताला लगाया, नए प्रधानाचार्य ने समझाइश की

चिड़ावा : चिड़ावा शहर के पिलानी रोड स्थित अडूकिया राजकीय महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रधानाचार्य प्रदीप मोदी के चूरू ट्रांसफर को लेकर शहरवासियों और अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा गया। स्थानांतरण के विरोध में बड़ी संख्या में अभिभावकों और क्षेत्रवासियों ने स्कूल के मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया और स्कूल पर तालाबंदी कर दी। इस कारण काफी देर तक बच्चे स्कूल के बाहर खड़े रहे, हालांकि बाद में ताला खोल दिया गया।

प्रधानाचार्य ने अभिभावकों से की समझाइश।
प्रधानाचार्य ने अभिभावकों से की समझाइश।

स्कूल की व्यवस्थाएं और अनुशासन काफी बेहतर था-अभिभावक

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना है कि प्रधानाचार्य प्रदीप मोदी के कार्यकाल में स्कूल की व्यवस्थाएं और अनुशासन काफी बेहतर थे। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि वर्तमान में स्कूल में अनुशासनहीनता का माहौल बन रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों और महिलाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें केवल प्रदीप मोदी ही इस पद पर चाहिए, क्योंकि उनके नेतृत्व में बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित था। अभिभावकों ने यह भी रोष व्यक्त किया कि बच्चे समय पर स्कूल पहुंचते हैं, लेकिन कई बार शिक्षक कक्षाओं से अनुपस्थित रहते हैं या कक्षाओं में लापरवाही होती है।

सूचना मिलने पर नए प्रधानाचार्य संदीप कुमार पूनिया मौके पर पहुंचे और अभिभावकों से समझाइश का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानाचार्य प्रदीप मोदी का स्थानांतरण शासन के प्रशासनिक आदेश के तहत हुआ है, जिसमें स्थानीय स्तर पर बदलाव करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

नए प्रधानाचार्य ने दिया आश्वासन

प्रधानाचार्य पूनिया ने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि स्कूल में छात्रहित और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पूरा स्टाफ तत्पर रहेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों से ली जाने वाली फीस को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, ताकि किसी भी अभिभावक पर आर्थिक बोझ न पड़े।

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