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80 साल पुराना खेत रास्ता बंद पर किसानों का प्रदर्शन:तहसील कार्यालय के बाहर किया विरोध, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी


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80 साल पुराना खेत रास्ता बंद पर किसानों का प्रदर्शन:तहसील कार्यालय के बाहर किया विरोध, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

80 साल पुराना खेत रास्ता बंद पर किसानों का प्रदर्शन:तहसील कार्यालय के बाहर किया विरोध, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

सरशाहरशहर : सरशाहरशहर में 100 से अधिक किसानों ने भानीपुरा तहसील कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उनका प्रदर्शन बिजरासर गांव से निवाली जोहड़ी जाने वाले करीब 80 वर्ष पुराने सदामत खेत रास्ते को बंद किए जाने को लेकर था। किसानों ने रास्ता खुलवाने की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव के राजेंद्र सिंह पोटलिया ने राजनीतिक और धनबल के प्रभाव से अपने खेत में होकर गुजरने वाले वर्षों पुराने सदामत रास्ते को रोक दिया है। इस रास्ते का उपयोग किसान लंबे समय से अपने खेतों तक आवागमन के लिए करते आ रहे थे। रास्ता बंद होने से खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो गए हैं।

बवाई का समय आने-जाने में समस्या

किसानों का कहना है कि वर्तमान में खरीफ फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। कई खेतों में बुवाई हो चुकी है, जबकि कुछ खेत अभी जोतने बाकी हैं। रास्ता बंद होने के कारण ट्रैक्टर व कृषि उपकरण खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों ने प्रशासन से अविलंब रास्ता खुलवाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो मजबूर होकर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

तहसीलदार बोले कार्रवाई की जाएगी

भानीपुरा तहसीलदार मुरारीलाल वर्मा ने बताया कि किसानों का ज्ञापन प्राप्त हो गया है। संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर दिया गया है। मामले की जल्द जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि सदामत रास्ते पर अतिक्रमण पाया गया तो किसानों के आवागमन के लिए रास्ता बहाल कराया जाएगा।

ये रहे मौजूद

प्रदर्शन में पृथ्वी सिंह, कानदास, जगदीशदास, भंवरदास, लालचंद, प्रेमचंद, सांवरमल, लक्ष्मीनारायण, परमेश्वरलाल, ज्ञानदास, पूर्ण सिंह, हजारीमल, उमेद सिंह, प्रभुराम, अखी देवी, परमेश्वरी, रुक्मणी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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