जय बजरंग बली’ लिखने पर पुलिस का ‘एक्शन’, आस्था के नाम पर काटा चालान, वहीं ‘POLICE’ लिखी निजी गाड़ियों पर खाकी मेहरबान
POLICE का स्टीकर और वी आईपी नाम, स्टील के बंपर, अध्यक्ष, पार्षद, विधायक, सभापति, लिखकर धड़ल्ले से बेखौफ दौड़ रहे हैं निजी वाहन, रसूख के सामने नतमस्तक दिखा सिस्टम
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर
जयपुर : राजस्थान में इन दिनों यातायात नियमों की पालना कराने और कानून का राज स्थापित करने के नाम पर पुलिस का जबरदस्त ‘महाअभियान’ देखने को मिल रहा है। इस अभियान के तहत आम जनता को कानून का ऐसा कड़ा पाठ पढ़ाया जा रहा है कि देखकर आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएं। लेकिन जैसे ही बात रसूखदारों, वीआईपी और खुद खाकी के अपनों पर आती है, तो पुलिस की यही मुस्तैदी अचानक मोतियाबिंद का शिकार हो जाती है।
कानून की इसी अजीबोगरीब और दोहरी कार्यशैली का एक ऐसा झकझोर देने वाला मामला राजस्थान पुलिस के मुख्यालय यानी राजधानी जयपुर से सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, 26 जून 2026 को जयपुर के खोरा बिसल थाना क्षेत्र के तहत सरना इंडस्ट्रियल एरिया में राजस्थान पुलिस ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक चर्चा का विषय बना हुआ है। वहां से गुजर रही एक कमर्शियल गाड़ी (वाहन संख्या: RJ 41 GA 8668) को पुलिस ने चेकिंग के दौरान रोका। इस वाहन के चालक अनिल कुमार ने बताया कि वे ‘श्री किसान ट्रांसपोर्ट कंपनी झोटवाड़ा जयपुर’ की गाड़ी लेकर जा रहे थे। गाड़ी में सब कुछ दुरुस्त होने के बावजूद खोरा बिसल पुलिस ने वाहन की आरसी सीज करते हुए सिर्फ इसलिए चालान काट दिया क्योंकि उसके आगे के शीशे पर ‘जय बजरंग बली’ लिखा हुआ था। बकायदा पुलिस द्वारा काटे गए सरकारी चालान पर पेन से लिखा गया है – “वक्त चेकिंग वाहन के आगे के शीशे पर हिन्दी में जय बजरंग बली लिखा हुआ है।” पुलिस ने न सिर्फ आस्था के इस नाम पर आपत्ति जताई, बल्कि गाड़ी का चालान काटकर उसकी आरसी तक जब्त कर ली। आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या राजस्थान में भगवान का नाम लिखना अब इतना बड़ा अपराध हो गया है कि पुलिस को भारी-भरकम कानूनी डंडा चलाना पड़े?

पुलिस का लोगो लगाकर बेखौफ घूम रहे निजी वाहन खाकी मेहरबान?
इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू बेहद हैरान और विचलित करने वाला है। एक तरफ जहां आस्था के दो शब्दों पर पुलिस की ईगल-आई (चील जैसी नजर) काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जयपुर की ही सड़कों पर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए दर्जनों निजी वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं। जनमानस शेखावाटी न्यूज’ की टीम के अनिल शेखीसर और आबिद खान फतेहपुर ने एक मजबूत टीम बनाकर जब इस भेदभावपूर्ण कार्रवाई के बाद धरातल पर उतरकर राजधानी के विभिन्न इलाकों में रियलिटी चेक और पड़ताल की, तो जो हकीकत सामने आई वह चौंकाने वाली हैं।

जयपुर सहित राजस्थान में सैकड़ों ऐसी निजी गाड़ियां धड़ल्ले से घूम रही हैं, जिनके आगे और पीछे बड़े-बड़े अक्षरों में ‘POLICE’, ‘पुलिस’ या राजस्थान पुलिस का मोनो/स्टीकर लगा हुआ है। और स्टील का बंपर लगा हुआ हैं। जब हमारी टीम ने गहराई से तफ्तीश की तो पता चला कि इनमें से अधिकांश गाड़ियां न तो पुलिस विभाग की हैं और ना ही किसी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी की। ये निजी गाड़ियां कथित तौर पर पुलिस के आला अधिकारियों के बेटों, पोतों, भाइयों, रिश्तेदारों या उनके चहेतों की हैं, जो टोल नाकों पर टैक्स बचाने, धौंस जमाने और पुलिसिया रौब झाड़ने के लिए अवैध रूप से इन स्टीकर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन रसूखदारों पर कार्रवाई करना तो दूर, पुलिस इन्हें देखकर भी अनदेखा कर देती है।
यह भेदभाव सिर्फ पुलिस शब्द तक ही सीमित नहीं है। पूरे राजस्थान और देश भर की सड़कों पर निजी वाहनों पर ‘पार्षद’, ‘चेयरमैन’, ‘विधायक’, ‘प्रधान’ सभापति, सरपंच युवा नेता, और ‘जिला अध्यक्ष’ जिला महामंत्री जैसे राजनीतिक रसूख वाले नाम और पद पट्टिकाएं आम देखी जा सकती हैं, जो मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों का सरेआम उल्लंघन हैं। लेकिन क्या मजाल कि कोई पुलिसकर्मी इन वीआईपी बोर्ड लगी गाड़ियों को रोककर उनकी आरसी जब्त करने की हिम्मत भी दिखा सके! क्या राजस्थान पुलिस के नियम-कायदे सिर्फ उन गरीब ड्राइवरों और आम जनता के लिए बने हैं जो अपनी गाड़ियों पर सुरक्षा और आस्था के लिए ‘जय बजरंग बली’ या ‘जय श्री राम’ या माशा अल्लाह लिखवाते हैं?

क्या रसूख की आड़ में निजी गाड़ियों पर अवैध रूप से ‘पुलिस’ लिखकर घूमना न्यायसंगत है? जनता के दिलों में टीस पैदा करने वाला यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) और आला अधिकारी ऐसा कोई निष्पक्ष अभियान चलाएंगे, जिसके तहत आम और खास का भेद मिटाकर, इन रसूखदारों की निजी गाड़ियों से भी ‘पुलिस’ और ‘नेताओं’ के अवैध स्टीकर्स हटाए जा सकें? कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए; अगर शीशे पर आस्था का नाम जय बजरंग बली, माशा अल्लाह, जय श्री राम, लिखना गुनाह है, तो निजी गाड़ीयो पर खाकी का रौब झाड़ना उससे भी बड़ा कानूनी अपराध हैं।
अब देखना यह है कि क्या पुलिस का यह कानूनी डंडा समान रूप से सब पर चलेगा, या फिर रसूख के आगे खाकी ऐसे ही नतमस्तक बनी रहेगी। क्या डीजीपी इस मामले की लेकर एक विशेष अभियान चलाएंगे ये देखना होगा
मैं गाड़ी लेकर जा रहा था दादी का फाटक जयपुर के थोड़ा सा आगे औधोगिक एरिया में खाकी ड्रेस वाली पुलिस ने मुझे रोका और कहा कागज चेक करवाओ मेने कागज चेक करवा दिए मेरे सभी कागज ओके थे तब पुलिस ने कहा ये नाम जय बजरंग बली क्यों लिख रखा हैं ये लिखना गलत हैं और उसे हटाने को कहा मेने कहा हटा देंगे साहब, जिस पर मेरे से आरसी मांगी गई चालान काटा गया और आरसी जब्त कर ली गई। – वाहन चालक अनिल कुमार जयपुर
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