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चिराना अस्पताल या ‘बकरी फार्म’..?, मरीजों से ज्यादा बकरियों का डेरा, लाखों की लागत से बना गार्डन चबा गईं बकरियां, परिसर में गंदगी फैलने से दुर्गंध


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चिराना अस्पताल या ‘बकरी फार्म’..?, मरीजों से ज्यादा बकरियों का डेरा, लाखों की लागत से बना गार्डन चबा गईं बकरियां, परिसर में गंदगी फैलने से दुर्गंध

मुख्य गेट पर कैटल गार्ड होने के बावजूद कुछ ग्रामीणों की तानाशाही के कारण परिसर में पसरी गंदगी, चिकित्सा प्रभारी बोले-अब होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : जनमानस शेखावाटी सवांददाता : 

उदयपुरवाटी : चिराना कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों मरीजों के इलाज के बजाय आवारा पशुओं और बकरियों का प्रमुख ठिकाना बन चुका है। अस्पताल परिसर में दिनभर रहने वाले बकरियों के जमावड़े के कारण यहाँ आने वाले मरीजों और अपनी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल की बाउंड्री वॉल पूरी तरह सुरक्षित व अच्छी स्थिति में है। यहाँ तक कि मुख्य गेट पर पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए ‘कैटल गार्ड’ भी लगाया गया है।

इसके बावजूद कुछ स्थानीय ग्रामीणों की मनमानी एवं गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते वे अपनी बकरियों को खुला छोड़ देते हैं, जो मुख्य गेट के रास्ते आसानी से परिसर के भीतर दाखिल हो जाती हैं। इन आवारा पशुओं ने अस्पताल परिसर में स्थित खूबसूरत गार्डन की हरियाली को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। परिसर में लगे कीमती पेड़-पौधों को चरकर खंडित किया जा रहा है। इसके अलावा जगह-जगह बकरियों की खाद और मलमूत्र के अपशिष्ट बिखरे होने के कारण पूरे अस्पताल परिसर में असहनीय दुर्गंध फैली रहती है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।

परिजनों का इलाज छोड़ कर, पशुओं को खदेड़ता रहता है अस्पताल स्टाफ
अस्पताल स्टाफ ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद पशुओं के अंदर आने से उन्हें अपनी मूल ड्यूटी छोड़कर बार-बार इन जानवरों को बाहर खदेड़ना पड़ता है। इसकी वजह से मरीजों के इलाज और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।

लापरवाह पशुपालकों पर लगेगा भारी जुर्माना – चिकित्सा प्रभारी
चिकित्सा प्रभारी डॉ. मनोज कुमार कुमावत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि अस्पताल की बाउंड्री वॉल और कैटल गार्ड सही हालत में होने के बाद भी कुछ लोग जानबूझकर अपने पशुओं को खुला छोड़ रहे हैं। हमने संबंधित बकरी पालकों को कई बार मौखिक रूप से समझाकर चेतावनी दी, लेकिन उनके रवैये में कोई सुधार नहीं आया। अब हम इन लापरवाह पशुपालकों को चिन्हित कर रहे हैं। इनके खिलाफ सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा रहा है।

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