मोहर्रम पर अकीदत का सैलाब, शान-ओ-शौकत से निकला ताजिया जुलूस, अखाड़ों के हैरतअंगेज करतबों ने मोहा मन
हजारों अकीदतमंद हुए शामिल, ‘या हुसैन’ के नारों से गूंजा नगर, जगह-जगह हुआ स्वागत और सेवा शिविरों का आयोजन
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा
बीदासर : मोहर्रम के अवसर पर बीदासर नगर मे अकीदत, श्रद्धा और गंगा-जमुनी तहजीब की शानदार मिसाल देखने को मिली। नगर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य ताजिया जुलूस निकाला गया, जिसमें हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों के साथ-साथ सर्व समाज के नागरिकों ने भी भाग लेकर आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश दिया। पूरे नगर में “या हुसैन”, “या अली” और “लब्बैक या हुसैन” के नारों की गूंज सुनाई देती रही। सुबह से ही ताजियादार अपने-अपने ताजियों के साथ निर्धारित स्थानों पर एकत्रित होने लगे।
आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक कला से सुसज्जित ताजिए श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे। निर्धारित समय पर धार्मिक रस्मों के बाद जुलूस प्रारंभ हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गों, बाजारों और चौकों से होकर अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंचा। जुलूस के दौरान विभिन्न अखाड़ों के उस्तादों और युवाओं ने लाठी, तलवार, गदका, फरी, चकरी और अन्य पारंपरिक युद्ध कलाओं के शानदार करतब प्रस्तुत किए। कलाकारों ने अनुशासन और कौशल के साथ ऐसे हैरतअंगेज प्रदर्शन किए कि मार्ग के दोनों ओर खड़े लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। छोटे बच्चों और युवाओं की विशेष भागीदारी भी देखने को मिली।
मार्ग में जगह-जगह समाजसेवी संस्थाओं, व्यापार मंडल, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा शर्बत, ठंडे पेयजल, फल एवं अन्य जलपान की व्यवस्था की गई। भीषण गर्मी के बीच इन सेवा शिविरों का लाभ हजारों लोगों ने उठाया। कई स्थानों पर ताजिया जुलूस का पुष्पवर्षा कर स्वागत भी किया गया। धर्मगुरुओं ने अपने संदेश में कहा कि कर्बला की घटना केवल एक धार्मिक इतिहास नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, मानवता, त्याग और बलिदान की अमर गाथा है।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के सामने कभी समझौता नहीं किया और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। उनका जीवन आज भी पूरी दुनिया को सच्चाई, ईमानदारी और इंसानियत के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। मोहर्रम के आयोजन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। जुलूस मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा तथा वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने लगातार व्यवस्था का जायजा लिया। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए, जिससे पूरे आयोजन के दौरान कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी। चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाओं की भी व्यवस्था रखी गई।
नगर के विभिन्न समुदायों के लोगों ने जुलूस में शामिल होकर आपसी सौहार्द और भाईचारे का परिचय दिया। कई सामाजिक संगठनों ने सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, शांति और धार्मिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखा गया। मोहर्रम का यह भव्य आयोजन बीदासर की सामाजिक समरसता, सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की परंपरा को एक बार फिर मजबूत करता नजर आया। श्रद्धा, अनुशासन और सेवा भावना के साथ संपन्न हुए इस आयोजन ने नगरवासियों को एकता, प्रेम और मानवता का संदेश दिया।
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