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उमंग-7 अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई, पाटन में 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त


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उमंग-7 अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई, पाटन में 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त

उमंग-7 अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई, पाटन में 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त

पाटन : सीकर जिले में बाल श्रम और मानव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे उमंग-7 अभियान के तहत प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पाटन स्थित गुरुजी स्वीट्स से 7 नाबालिग बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया। यह कार्रवाई महिला अनुसंधान सेल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोरी लाल के निर्देशन में मानव तस्करी विरोधी यूनिट, पाटन थाना पुलिस, गायत्री सेवा संस्थान एवं चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम द्वारा की गई।

मानव तस्करी विरोधी यूनिट के एएसआई गिरधारी लाल ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सातों बच्चे प्रतिष्ठान पर काम करते पाए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बच्चों से प्रतिदिन 12 से 13 घंटे तक कार्य कराया जा रहा था। मुक्त कराए गए बच्चों में दो 11 वर्षीय, दो 17 वर्षीय, एक 14 वर्षीय, एक 13 वर्षीय तथा एक 12 वर्षीय नाबालिग शामिल हैं।

कार्रवाई के बाद सभी बच्चों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पाटन में मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद उन्हें बाल कल्याण समिति सदस्य डॉ. पुष्पा सैनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के निर्देशानुसार बच्चों को कस्तूरबा सेवा संस्थान में अस्थायी आश्रय दिया गया है, जहां उनके भोजन, सुरक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास की व्यवस्था की गई है।

संयुक्त कार्रवाई में मुन्नी देवी, मंगेज राम, नरेश कुमार सैनी, अभिषेक बगड़िया, जितेंद्र नाथावतपुरा और राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोरी लाल ने कहा कि “उमंग-7 अभियान का उद्देश्य बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करना है। बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

वहीं गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक नरेश कुमार सैनी ने बताया कि संस्थान लंबे समय से बाल श्रम, बाल विवाह और मानव तस्करी के खिलाफ कार्य कर रहा है। प्रशासन और पुलिस के सहयोग से बच्चों को शोषण से मुक्त कर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि उमंग-7 अभियान के तहत जिलेभर में लगातार निरीक्षण और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि बाल श्रम पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित एवं सम्मानजनक बचपन मिल सके।

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