अस्पताल में अंधेरा सोशल मीडिया पर विधायक और डॉक्टर सुभाष चंद्र के बीच छिड़ी बहस
जब-जब कुर्सी पर आई आँच, तब-तब छेड़ा गया जाति का राग। विधायक पहुंचे अस्पताल तो सोशल मीडिया पर मिला जवाब..?
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर
फतेहपुर : एक और जहां धानुका अस्पताल में मरीज अंधेरे में मोबाइल टॉर्च के सहारे हैं तो वही दूसरी और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर विधायक और डॉक्टर सुभाष चंद्र के बीच छिड़ी सोशल मीडिया की बहस सोशल मीडिया का अखाड़ा बनती नजर आ रही हैं। क्षेत्रीय विधायक हाकम अली खान के पीएसओ के पेट में दर्द होने पर उन्हें लेकर विधायक हाकम अली फतेहपुर की धानुका अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल में अंधेरा छाया हुआ था अस्पताल में बिजली व्यवस्था की बदहाली पर विधायक हाकम अली ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में जनरेटर उपलब्ध करवाया गया था, फिर भी अस्पताल में बिजली की समस्या बनी हुई है और मरीज परेशान हो रहे हैं।
लेकिन अस्पताल की अव्यवस्थाओं का जवाब देने के बजाय सोशल मीडिया पर डॉक्टर सुभाष चंद्र नामक फेसबुक आईडी से से सीधे जाति कार्ड का खेल मैदान पर देखने को मिला हैं।
आमजन में चर्चा हैं कि यह अकाउंट पीएमओ साहब खुद ऑपरेट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “एक भोला-भाला जाट PMO बन गया, इसलिए उस पर आरोप लगाए जा रहे हैं।”
अगर यह अकाउंट पीएमओ डॉक्टर सुभाष महला का हैं तो साहब, सवाल आपकी जाति पर नहीं, आपकी कार्यप्रणाली पर उठे हैं। अस्पताल में बिजली क्यों नहीं है? मरीज परेशान क्यों हैं? व्यवस्थाएं चरमराई हुई क्यों हैं? इन सवालों का जवाब दीजिए। जनता ने आपको अस्पताल चलाने के लिए देखा है, जातीय सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं।
और यदि बात “भोलेपन” की ही करनी है, तो शायद इसी भोलेपन में वर्ष 2017 में सरकारी सेवा में रहते हुए निजी क्लिनिक में डिलीवरी करवाने के मामले में गंभीर आरोप लगे थे। उस घटना में एक महिला की मृत्यु हुई और किसी परिवार की बेटी एवं बहू की जिंदगी हमेशा के लिए समाप्त हो गई। FIR संख्या 160/2017 दर्ज हुई, जांच हुई और मामला अदालत तक पहुंचा था। उस समय भी क्या यही भोलेपन का परिचय था?
कुछ दिनों पहले पत्रकारों द्वारा समाचार संकलन हेतु अस्पताल जाने के मामले में भी सोशल मीडिया आईडी से तुरंत जवाब डाला गया था और पीएमओ साहब सीधा कोतवाली थाने पहुंच गए थे

पीएमओ पूर्व में अपने ही कर्मचारियों पर राजकर्य में बाधा जैसी धाराओं की कर चुके हैं मांग
इतना ही नहीं, 16 फरवरी 2025 को पीएमओ डॉक्टर सुभाष महला द्वारा अपने ही स्टाफ के तीन कर्मचारियों पर राजकार्य में बाधा और अभद्र व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग लिखित में की गई, लेकिन अगले ही दिन यह कहते हुए शिकायत वापस ले ली गई कि उन्हें गलतफहमी हो गई हैं। आखिर ऐसी शिकायतें क्यों होती हैं और फिर इतनी जल्दी वापस क्यों ले ली जाती हैं? जनता सब समझती है। में निजी अस्पताल नही चलाता कहने वाले पीएमओ साहब का एफ आई आर में साबित हो चुका हैं कि इनका निजी अस्पताल हैं।
हैरानी इस बात की है कि अस्पताल में बिजली नहीं होने पर शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय जाति का ढाल सामने कर दिया गया। मानो अस्पताल की अव्यवस्थाओं का जिम्मेदार कोई और हो और सवाल पूछना ही अपराध हो।
सच तो यह है कि जब तक सब ठीक चलता है तब तक प्रशासन की बात होती है, लेकिन जैसे ही जवाबदेही का समय आता है, कुछ लोगों को अचानक अपनी जाति याद आ जाती है। आमजन में चर्चा हैं कि पीएमओ समय समय पर जाति को ढाल बनाकर अपना काम आसान कर लेते हैं।
जनता को जाति नहीं चाहिए, इलाज चाहिए।
मरीजों को बयान नहीं चाहिए, बिजली चाहिए।
और अस्पताल को भावनात्मक भाषण नहीं, जिम्मेदार प्रशासन चाहिए।
आलोचना से बचने के लिए जाति का सहारा लेना सबसे आसान रास्ता है, लेकिन इससे अस्पताल की एक भी लाइट नहीं जलने वाली।

साहब, अस्पताल की ओपीडी की पर्ची पर ‘जाति’ देखकर दवा नहीं लिखी जाती, तो फिर बिजली गुल होने पर जाति की ढाल क्यों? जनता ने आपको स्टेथॉस्कोप थमाया है, सहानुभूति का झुनझुना नहीं। सवाल कार्यप्रणाली पर था, बिरादरी पर नहीं। लेकिन जब जवाब न सूझे, तो ‘भोलापन’ सबसे सुरक्षित कोना बन जाता है।
जनमानस शेखावाटी न्यूज सोशल मीडिया अकाउंट की पुष्टि नहीं करता मगर आमजन में चर्चा इस बात की हैं कि ये वही अकाउंट हैं जिसे डॉक्टर सुभाष महला समय समय पर जवाब देने के लिए काम में लेते आए हैं।
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