दादू दयाल संत आश्रम में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की अनुपम छटा
जयघोषों से गूंजा कथा पांडाल, श्रद्धा और भक्ति में डूबे श्रद्धालु
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा
बीदासर : दादू दयाल संत आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण का वर्णन शुरू किया, पूरा कथा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा।
कथा में बीदासर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा प्रारंभ से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्रीकृष्ण, राधारानी एवं श्रीमद्भागवत महापुराण का पूजन-अर्चन किया गया। कथा वाचक देवकीनंदन शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि जब अधर्म और अत्याचार चरम पर पहुंच गया था, तब भगवान श्रीहरि ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना की।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, प्रेम, न्याय और लोककल्याण का संदेश देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से दिए गए उनके उपदेश आज भी मानव जीवन के लिए प्रासंगिक हैं।
झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
जन्मोत्सव के अवसर पर बाल गोपाल की आकर्षक झांकी सजाई गई। भगवान श्रीकृष्ण को सुंदर वस्त्र, मुकुट, मोरपंख और पुष्प मालाओं से अलंकृत कर भव्य पालने में विराजमान किया गया। शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और पुष्पवर्षा के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान का स्वागत किया। कृष्ण भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।
युवाओं को दिए संस्कारों के संदेश
कथा व्यास ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा, हिंसा और सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
महाआरती के साथ हुआ समापन
आश्रम परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत सजावट और पुष्प मालाओं से आकर्षक रूप दिया गया। कथा के समापन पर सामूहिक महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया।
कथा आयोजन समिति के अनुसार आगामी दिनों में श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, कालिया नाग दमन, गोवर्धन पूजा, महारास, सुदामा चरित्र सहित विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा प्रतिदिन सुबह 9 से 12 बजे तथा दोपहर 2 से 5 बजे तक आयोजित की जा रही है। क्षेत्रभर से श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
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