19 साल के अग्निवीर प्रदीप कुमार को नम आंखों से अंतिम विदाई, 10 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
बचपन से था देश सेवा का जुनून, पिता से कहा था- "मेरा सपना सिर्फ सेना में जाकर देश की सेवा करना है"
झुंझुनूं : शौर्य, बलिदान और देशभक्ति की पहचान बने झुंझुनूं जिले ने एक बार फिर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना एक वीर सपूत खो दिया। जिले के चिमनपुरा (बाड़ेट) गांव निवासी 19 वर्षीय अग्निवीर प्रदीप कुमार का 16 जून को ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में निधन हो गया। प्रदीप की शहादत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन बेटे के देशप्रेम और सेवा भावना पर सभी को गर्व भी है।
महज 19 वर्ष की उम्र में, जब अधिकांश युवा अपने भविष्य के सपने संजो रहे होते हैं, उस उम्र में प्रदीप ने देश सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और उसी राह पर चलते हुए मातृभूमि के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
शहादत वाले दिन हुई थी परिवार से आखिरी बातचीत
प्रदीप के पिता जगदीश प्रसाद ने नम आंखों से बताया कि 16 जून को दोपहर करीब तीन बजे उनकी बेटे से फोन पर बात हुई थी। उस समय प्रदीप ने बताया था कि वह रांची (झारखंड) स्थित 623 ईएमई बटालियन में स्विमिंग पूल पर ऑन-ड्यूटी तैनात है और पूरी तरह स्वस्थ है। पिता के अनुसार प्रदीप ने कहा था, “पापा, मैं बिल्कुल ठीक हूं, आप चिंता मत करना।” इसके बाद उसने अपनी मां से भी बात की और घर-परिवार का हालचाल जाना। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह बातचीत परिवार और प्रदीप के बीच आखिरी संवाद साबित होगी।
ड्यूटी के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
परिजनों के अनुसार फोन पर बातचीत के कुछ समय बाद ही यूनिट के स्विमिंग पूल पर एक हादसा हो गया। हादसे में प्रदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बचाने के लिए सैन्य अधिकारियों और चिकित्सकों ने हरसंभव प्रयास किए, लेकिन वे जिंदगी की जंग हार गए।
पिता ने बताया कि शाम को यूनिट के सूबेदार मेजर का फोन आया और उन्होंने हादसे की जानकारी दी। शुरुआत में अधिकारियों ने बताया कि स्थिति गंभीर है, लेकिन डॉक्टर लगातार प्रयास कर रहे हैं।
करीब आधे घंटे बाद दोबारा फोन आया। उस फोन कॉल को याद करते हुए पिता की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि सैन्य अधिकारी ने भारी मन से कहा, “साहब, हौसला रखना… हिम्मत मत हारना… बहुत कोशिशों के बाद भी हम प्रदीप को बचा नहीं पाए।” यह सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
बचपन से सेना में जाने का था सपना
प्रदीप तीन भाइयों में सबसे छोटे थे और पढ़ाई में बेहद मेधावी छात्र थे। उन्होंने 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। उनकी प्रतिभा को देखते हुए परिवार चाहता था कि वे किसी अन्य क्षेत्र में करियर बनाएं। पिता जगदीश प्रसाद बताते हैं कि उन्होंने कई बार प्रदीप को समझाया था कि वह सेना के अलावा किसी अन्य क्षेत्र में भी उज्ज्वल भविष्य बना सकता है। लेकिन प्रदीप का सपना कुछ और ही था।
पिता के अनुसार जब उन्होंने बेटे से कहा कि सेना से बेहतर भी कई करियर विकल्प हैं, तब प्रदीप ने गर्व के साथ जवाब दिया था – “नहीं पापा, मेरा विचार और मेरी इच्छा सिर्फ देश की खातिर जीने और मरने की है। मैं सेना में जाकर देश सेवा ही करूंगा।” बेटे के दृढ़ निश्चय को देखकर परिवार ने भी उसकी इच्छा का सम्मान किया और 23 अप्रैल 2025 को वह भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती हो गया।
डेढ़ महीने पहले ही पूरी की थी ट्रेनिंग
प्रदीप ने हाल ही में अपनी सैन्य ट्रेनिंग पूरी की थी। करीब डेढ़-दो महीने पहले वह पहली बार छुट्टी लेकर घर आया था। परिवार के साथ समय बिताने के बाद उसने वादा किया था कि अगले महीने फिर छुट्टी लेकर आएगा।
परिजनों को उम्मीद थी कि जल्द ही उनका बेटा फिर घर लौटेगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस बार वह छुट्टी पर नहीं, बल्कि तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटा।
तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
अग्निवीर प्रदीप कुमार का पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा तो पूरा इलाका शोक और गर्व की भावना से भर उठा। वीर सपूत के सम्मान में शहीद गजराज सिंह मूर्ति स्थल से चिमनपुरा (बाड़ेट) गांव तक करीब 10 किलोमीटर लंबी विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई।
तिरंगा यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। यात्रा के दौरान “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “शहीद प्रदीप कुमार अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। सेना की टुकड़ी ने अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। पूरे राजकीय सम्मान के साथ अग्निवीर प्रदीप कुमार का अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी और उनकी शहादत को नमन किया। गांव के लोगों ने कहा कि प्रदीप ने कम उम्र में जो साहस, समर्पण और देशभक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
गांव को अपने बेटे पर गर्व
प्रदीप की शहादत से जहां पूरे गांव में शोक का माहौल है, वहीं हर व्यक्ति को इस बात का गर्व भी है कि गांव का एक बेटा देश की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदीप का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा और उनका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।
देश सेवा का सपना लेकर सेना में शामिल हुआ यह युवा आज भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की गाथा हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।
गांव चिमनपुरा में अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
इस अवसर पर मंडावा विधायक रीटा चौधरी, झुंझुनूं के पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार खीचड़, अलसीसर पंचायत समिति के पूर्व प्रधान गिरधारी खीचड़, मलसीसर थानाधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार, संजय जांगिड़, कप्तान सुल्तान खान, ग्राम सरपंच प्रतिनिधि सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं ग्रामीणों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।






देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2216437


