खाली खेत में 40 लोगों को किराएदार बताया:हैवी लाइसेंस के लिए हरियाणा से आ रहे लोग, वहां वेटिंग और नियम सख्त
खाली खेत में 40 लोगों को किराएदार बताया:हैवी लाइसेंस के लिए हरियाणा से आ रहे लोग, वहां वेटिंग और नियम सख्त
झुंझुनूं : झुंझुनूं में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो हरियाणा के लोगों को रातों-रात यहां का किराएदार बना देता है और फिर परिवहन विभाग से उनके हैवी लाइसेंस जारी करवा देता है। उप पंजीयक कार्यालय में इन फर्जी किरायानामों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। परिवहन अधिकारी बिना जांच-पड़ताल किए हरियाणा के लोगों को इसी रजिस्टर्ड किरायानामे के आधार पर हैवी लाइसेंस बनाकर दे रहे हैं।
ये सभी लोग हरियाणा के हैं। इनका झुंझुनूं में न कोई व्यापार है और न ही नौकरी। फिर भी इन्हें किराएदार बना झुंझुनूं में रहना दिखा दिया। यह सब फर्जीवाड़ा हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किया जा रहा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि हरियाणा में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के कड़े नियमों से बचने के लिए वहां के लोग झुंझुनूं में फर्जीवाड़ा कर लाइसेंस बनवा रहे हैं।
इस किराएनामे में 40 लोगों को खाली खेत में किराएदार दिखा दिया। वजह यह सामने आई कि हरियाणा में हैवी लाइसेंस के लिए नियम सख्त हैं। ऐसे में यहां आकर ड्राइवर अपना पता बदल कर लाइसेंस बनवा रहे हैं।

हरियाणा में सख्ती और वेटिंग ज्यादा
हरियाणा में हैवी लाइसेंस के लिए वहां रोडवेज में ही 30 दिन की ट्रेनिंग करनी पड़ती है। हरियाणा में रोडवेज के डिपो व उप डिपो 39 हैं। एक डिपो में 30 सीटें हैं। ऐसे में वहां हर महीने 1170 को ही ट्रेनिंग मिलती है। जबकि राजस्थान में परिवहन विभाग ने ड्राइविंग स्कूलों को अधिकृत कर रखा है।
राजस्थान में 60 परिवहन कार्यालयों से जुड़े 900 से अधिक ड्राइविंग स्कूल हैं। प्रत्येक स्कूल में 30 सीटें हैं। ऐसे में यहां हर महीने 27000 हजार को सर्टिफिकेट मिलता है। हरियाणा में ट्रेनिंग के लिए वेटिंग अधिक रहती है। यहां आते ही ट्रेनिंग मिल जाती है।
1 साल में 1800 लाइसेंस
झुंझुनूं में एक माह पहले तक हर महीने हरियाणा के 150 से 200 हैवी लाइसेंस बनाए गए। यानी पूरे साल में 1800 से अधिक पिछले 6 माह में ही 1000 से अधिक बनाए गए। पिछले चार साल के आंकड़े खंगालने तो सामने आया कि हरियाणा के 7 हजार से अधिक लोगों को लाइसेंस जारी किए गए।
25 हजार में डॉक्युमेंट्स तैयार
प्रदेश में हर महीने हरियाणा के लोगों को औसतन 3 हजार हैवी लाइसेंस बनाकर दिए जा रहे हैं। झुंझुनूं में हरियाणा के एक व्यक्ति से हैवी लाइसेंस के लिए 25 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। हर महीने के 150 के हिसाब से जोड़ें तो एक महीने में 37.50 लाख और एक साल में 4.5 करोड़ रुपए लिए जा रहे हैं। इसमें किरायानामा के 5 हजार रुपए, ड्राइविंग स्कूल सर्टिफिकेट के 5 हजार रुपए, लाइसेंस शुल्क के 1500 रुपए शामिल हैं। शेष रुपए एजेंट व सहयोगी व वकील लेते हैं।

2 पॉइंट्स में समझिए फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
खेत में कागजी कॉलोनी:
परिवहन कार्यालय से 1 किमी दूर शहर के धनकड़ नगर के पास वारिसपुरा के एक खाली खेत (जहां कोई मकान नहीं है) के पते पर 24 मार्च को 40 लोगों का रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड हुआ। 400 वर्ग फीट में निर्माण दिखाकर 40 लोगों को किराएदार दिखाया गया। इन सभी के हैवी लाइसेंस जारी करा दिए गए।
दो कमरों में 27 लोग:
शहर के रीको एरिया से सटे धनकड़ नगर के मकान नंबर 6 (320 वर्ग फीट) में 27 लोग किराएदार दिखाए गए हैं। सभी हरियाणा के लोग हैं। मौके पर रहने वाली महिला का कहना है कि यहां कोई किराएदार नहीं रहता। यह किरायानामा 16 दिसंबर 2025 को बनाया गया। सभी के हैवी लाइसेंस जारी हो गए।
रोजाना 2 किराएनामे आ रहे
उपपंजीयक कार्यालय में औसतन रोजाना दो किरायानामा पंजीकृत हो रहे हैं। पिछले तीन महीने में जनवरी से मार्च के दौरान 95 से अधिक किरायानामा पंजीकरण कराए गए। एक किरायानामा में 25 से 40 लोगों को किराएदार बताया गया है। पिछले साल इसी अवधि में महज 32 किरायानामा पंजीकरण हुए थे। इस प्रक्रिया से लाइसेंस बनवाने का खर्च भी बढ़ा है।
बिना ट्रेनिंग बंट रहे सर्टिफिकेट
परिवहन विभाग से जुड़े ड्राइविंग स्कूलों में बिना वास्तविक ट्रेनिंग के सर्टिफिकेट बांटे जा रहे हैं। क्योंकि इनके पास न तो इतना बड़ा ट्रैक होता है और न ही इतनी गाड़ियां कि ये एक साथ इतने लोगों को ट्रेनिंग दे सकें। इसके बावजूद परिवहन विभाग इन पर नकेल नहीं कस रहा। दिल्ली पुलिस, बिहार पुलिस, राजस्थान पुलिस, सीआरपीएफ समेत अन्य में वाहन चालकों की भर्ती के लिए हैवी लाइसेंस मांगे जाते हैं।
2 पक्ष सहमत हैं तो किरायानामा बन सकता है
मामले को लेकर सब रजिस्ट्रार कुलदीपसिंह ने कहा- कोई भी दो पक्ष आपस में सहमत होकर आते हैं, तो किरायानामा बन जाता है। नियमानुसार शुल्क जमा कराने पर किरायानामा पंजीकरण किया जाता है। अधिक प्रॉपर्टी होने पर ही फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाता है। अन्यथा रैंडम वेरिफिकेशन होता है।”
बोले- सेक्शन 9 में प्रावधान
कार्यवाहक डीटीओ झुंझुनूं रमेश कुमार यादव ने कहा- ग्रांट ऑफ लाइसेंस के सेक्शन 9 में यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति जहां रहता है या बिजनेस करता है वहां लाइसेंस बनवा सकता है। ड्राइविंग स्कूल से ट्रेनिंग ले चुका है या ले रहा है तो लाइसेंस बनाया जा सकता है।
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