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कुड़ली से रामू का बास बायपास प्रोजेक्ट पर रोक:वित्त विभाग ने प्रस्ताव को फिट नहीं माना, 270 करोड़ की भेजी थी डीपीआर


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कुड़ली से रामू का बास बायपास प्रोजेक्ट पर रोक:वित्त विभाग ने प्रस्ताव को फिट नहीं माना, 270 करोड़ की भेजी थी डीपीआर

कुड़ली से रामू का बास बायपास प्रोजेक्ट पर रोक:वित्त विभाग ने प्रस्ताव को फिट नहीं माना, 270 करोड़ की भेजी थी डीपीआर

सीकर : सीकर शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने और झुंझुनूं-नवलगढ़ से सीधा जयपुर व खाटूश्यामजी जाने वालों के लिए बड़ी योजना अब अटक गई है। NH-52 (रामू का बास) से HH-08 (कुड़ली) तक बनने वाले बायपास पर रोक लग गई है।

वित्त विभाग ने इस बाइपास प्रोजेक्ट को ‘नॉन फिजिबल’ (अव्यावहारिक) की श्रेणी में डाल दिया है। संयुक्त शासन सचिव, वित्त (व्यय-3) विभाग, एजाज नबी खान ने प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रस्ताव की समीक्षा में ये डिसीजन दिया है।

वित्त विभाग के आदेशानुसार रामू का बास से कुड़ली तक के बायपास निर्माण कार्य टेक्निकल और फाइनेंशियल मापदंडों पर व्यावहारिक नहीं है। अब इस प्रोजेक्ट को फिलहाल निरस्त माना जा रहा है। सीकर में NH-52 और NH-58/HH-08 के बीच सीधी कनेक्टिविटी बनाने के लिए इस बायपास की योजना बनाई गई थी। PWD ने इस 10 किलोमीटर के प्रोजेक्ट के लिए 270 करोड़ रुपए की डीपीआर विभाग को भेजी थी।

डोटासरा ने साधा सरकार पर निशाना

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस मामले में भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सरकार ने पहले सीकर का संभाग छीन लिया, फिर नीमकाथाना जिला खत्म किया, सीकर को नगर निगम को वंचित किया, मास्टर प्लान नहीं दिया, यमुना जल समझौते में हितों से समझौता किया और अब इस बायपास प्रोजेक्ट को भी वापस लेकर बजट घोषणा पर ही रोक लगा दी। इस बायपास के बनने से भारी वाहनों को शहर के पुराने बाइपास और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिल जाती।

‘नॉन फिजिबल’ होने का क्या मतलब है?

फाइनेंस डिपार्टमेंट ने इस प्रोजेक्ट को नॉन फिजिबल घोषित कर दिया है। नॉन फिजिबल घोषित करने का मतलब यह है कि डिपार्टमेंट ने इस प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को फिट नहीं माना है। विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए 270 करोड़ की डीपीआर को काफी बड़ा माना जा रहा था।

प्रस्ताव पर दोबारा होगा विचार

फिलहाल इसे नॉन फिजिबल घोषित किया गया है। यह भी माना जा रहा है कि किसी दूसरी योजना के तहत भविष्य में दोबारा से इस प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। प्रस्तावित रूट पर भूमि अधिग्रहण में खर्च भी काफी आ रहा था।

सीकर शहर में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए एक बायपास की सख्त जरूरत है। हालांकि इस प्रोजेक्ट (रामू का बास से कुड़ली) को फिलहाल अव्यावहारिक मान लिया गया है। लेकिन बढ़ते ट्रैफिक‌ लोड को देखते हुए नए ऑप्शनल रूट का सर्वे करने का नया प्रस्ताव तैयार कर सकता है।

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