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बच्चे के दिल में छेद,इटली के दंपती ने गोद लिया:बोले- इसे ढेर सारा प्यार देना है; डेढ़ साल पहले पालना गृह में छोड़ गए थे परिजन


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बच्चे के दिल में छेद,इटली के दंपती ने गोद लिया:बोले- इसे ढेर सारा प्यार देना है; डेढ़ साल पहले पालना गृह में छोड़ गए थे परिजन

बच्चे के दिल में छेद,इटली के दंपती ने गोद लिया:बोले- इसे ढेर सारा प्यार देना है; डेढ़ साल पहले पालना गृह में छोड़ गए थे परिजन

झुंझुनूं : इटालियन कपल ने झुंझुनूं के पालना गृह से डेढ़ साल के बच्चे को गोद लिया है। बच्चे के दिल में छेद है, ये पता होने के बावजूद भी इटली के कपल ने इसे पालने का फैसला लिया है। बच्चे को गोद लेने वाली मां खुद कोलकाता से अडॉप्ट की गई थी। उनका कहना है- हमें फर्क नहीं पड़ता कि बच्चे की हेल्थ कैसी है, हम इसे एक सुरक्षित भविष्य देना चाहते हैं और ढेर सारा प्यार…

बच्चे को डेढ़ साल पहले प्री मैच्योर अवस्था में कोई पालना गृह में छोड़ गया था। बच्चे की जांचें की गई तो उसके दिल में छेद पाया गया। इसके बाद शिशु गृह में ही इसकी देखभाल की जा रही थी।

4 महीने चला डॉक्यूमेंटेशन

शिशु गृह के सुपरिटेंडेंट अंकित कुमार ने बताया- विदेश से भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया (Inter-country Adoption) थोड़ी लंबी होती है। इसमें डॉक्यूमेंटेशन में करीब 4 महीने का वक्त लग जाता है। इस मामले में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के माध्यम से पिछले 4 महीनों से गहन जांच और डॉक्यूमेंटेशन चल रहा था। इसी पालना गृह से पहले भी एक बच्चा स्पेन और एक बच्ची अमेरिका के परिवारों ने गोद ली थी।

दंपती ने स्पेशल नीड चाइल्ड को चुना

इटालियन एजेंसी के प्रतिनिधि जमाल मुर्शीद ने बताया- अडॉप्शन के लिए प्रोफाइल मैचिंग हो गई थी। इस दौरान दंपती के सामने एक स्पेशल नीड वाले बच्चे का नाम आया। उन्होंने तुरंत इसके लिए हां कर दी। उन्होंने कोई संकोच नहीं किया कि मासूम के दिल में छेद है।

झुंझुनूं के शिशु पालना गृह से स्पेन और अमेरिका के परिवारों ने भी बच्चों को अडॉप्ट किया है।
झुंझुनूं के शिशु पालना गृह से स्पेन और अमेरिका के परिवारों ने भी बच्चों को अडॉप्ट किया है।

मैं खुद भारत से, मुझे इटालियन परिवार ने गोद लिया

बच्चे को अपनाने वाली मां बताती हैं- मेरा भारत से पुराना नाता रहा है। मैं खुद अडॉप्टेड (गोद ली हुई) हूं। करीब 35 साल पहले मुझे कोलकाता से एक इटालियन परिवार ने गोद लिया था। अब जब मुझे भी बच्चा अडॉप्ट करना था तो मैंने इंडिया से बच्चे को चुनने का फैसला किया। हमने एक ऐसे बच्चे को चुना, जिसे देखभाल की जरूरत थी।

हमें बच्चे की बीमारी से फर्क नहीं पड़ता

बच्चे को अपनाने वाले पिता कहते हैं- हमारी शादी 2017 में हुई थी। इसके बाद हमने एक बच्चा अडॉप्ट करने की सोची। हमारा परिवार तब तक अधूरा था, जब तक हमें यह बच्चा नहीं मिला। हमें अपने बेटे की बीमारी या हेल्थ कंडीशन से कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें बस इसे ढेर सारा प्यार देना है और एक सुरक्षित भविष्य देना है।

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