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रानौली में ऐतिहासिक गणगौर मेला शनिवार को:दो दिन चलेगा उत्सव, गढ़ से निकलेगी ईसर-गणगौर की शाही सवारी


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रानौली में ऐतिहासिक गणगौर मेला शनिवार को:दो दिन चलेगा उत्सव, गढ़ से निकलेगी ईसर-गणगौर की शाही सवारी

रानौली में ऐतिहासिक गणगौर मेला शनिवार को:दो दिन चलेगा उत्सव, गढ़ से निकलेगी ईसर-गणगौर की शाही सवारी

रानौली : कस्बे में दो दिवसीय ऐतिहासिक गणगौर मेला कल से शुरू होगा। यह मेला लगभग ढाई सौ वर्षों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है, जो हर साल रानोली नदी के पाट में भरता है। इसे अंचल का सबसे पुराना और सर्वाधिक भीड़ वाला मेला माना जाता है, जिसमें आसपास के गांवों के साथ-साथ प्रवासी भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

इतिहास के अनुसार, खंडेला रियासत के राजा शंभू सिंह के समय यह क्षेत्र ‘रिणवा वाली ढाणी’ के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में विकसित कर रानोली नाम दिया गया। राजा पृथ्वी सिंह के शासनकाल में मेड़ता से गणगौर की प्रतिमाएं लाई गईं, जिसके बाद से ईसर-गणगौर की शाही सवारी निकालने की परंपरा शुरू हुई।

यह शाही सवारी गढ़ परिसर से निकलकर नदी के पाट होते हुए कालीदेह तिवारी तक जाती है। वर्तमान में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गीत गाती हुई सवारी के पीछे चलती हैं। पुराने समय में दरबारी प्रतिमाओं को सिर पर उठाकर ले जाते थे। राजवंश के अंतिम दौर में राजा शेर सिंह, नवल सिंह, हुकुम सिंह, भरतावर सिंह, छत्रपाल सिंह, अमर सिंह और आनंद सिंह के समय भी यह सवारी शाही अंदाज में निकाली जाती थी।

पुराने समय में मेले में हाट-बाजार सजता था और ऊंट-घोड़ों की दौड़ भी होती थी। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। इस वर्ष मेले में लगभग 1.50 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना है, जिससे मेले में अच्छी खासी भीड़ रहने की उम्मीद है।

रानोली के सरपंच (प्रशासक) औंकारमल सैनी ने बताया कि ग्राम पंचायत ने मेले के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, टेंट, रात्रि प्रकाश और स्वच्छता की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, दुकानदारों के लिए निःशुल्क भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

सुरक्षा के मद्देनजर मेला परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दमकल, एम्बुलेंस और मेडिकल कैंप की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

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