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झुंझुनूं में जिंदा-युवक को मृत बताया, डॉक्टर को किया तलब:सीजेएम बोले- शव का परीक्षण बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाना गंभीर अपराध


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झुंझुनूं में जिंदा-युवक को मृत बताया, डॉक्टर को किया तलब:सीजेएम बोले- शव का परीक्षण बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाना गंभीर अपराध

झुंझुनूं में जिंदा-युवक को मृत बताया, डॉक्टर को किया तलब:सीजेएम बोले- शव का परीक्षण बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाना गंभीर अपराध

झुंझुनूं : झुंझुनूं में जिंदा युवक को मृत बताने पर कोर्ट ने डॉक्टर पर कार्रवाई करते हुए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मामले में सीजेएम ने पुलिस की एफआर खारिज कर डॉक्टर को तलब किया है। बीडीके हॉस्पिटल में 21 नवंबर 2024 को हुई इस घटना में बिना जांच पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

युवा जिसको मृत्यु घोषित कर दिया गया था
युवा जिसको मृत्यु घोषित कर दिया गया था

डॉक्टर नवनीत मील को किया तलब

कोर्ट ने इस कृत्य को गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी डॉक्टर नवनीत मील के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया है। उन्हें सम्मन जारी कर अदालत में पेश होने के आदेश दिए गए हैं।

21 नवंबर 2024 को हुआ था मामला

यह मामला 21 नवंबर 2024 का है, जब बगड़ स्थित एक विमंदित पुनर्वास केंद्र से युवक को इलाज के लिए बीडीके हॉस्पिटल लाया गया था। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. योगेश जाखड़ ने युवक को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद डॉ. नवनीत ने बिना शरीर का परीक्षण किए कागजों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर दी और शव परिजनों को सौंप दिया।

श्मशान में जिंदा मिला युवक

मामले में उस समय मोड़ आया जब श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान युवक के शरीर में हलचल हुई। इसके बाद उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां से उसे गंभीर हालत में जयपुर रेफर किया गया। जयपुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

डॉ. नवनीत मील।
डॉ. नवनीत मील।

पुलिस जांच पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

कोतवाली पुलिस ने जांच के बाद किसी को दोषी नहीं मानते हुए एफआर पेश कर दी थी। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। 8 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने 8 बिंदुओं पर दोबारा जांच के आदेश दिए थे।

सीसीटीवी और डाक्यूमेंट्स से खुला मामला

कोर्ट ने सीएमएचओ के माध्यम से हॉस्पिटल प्रशासन से भर्ती, ईसीजी रिपोर्ट और रेफरल डाक्यूमेंट्स की जांच रिपोर्ट मांगी। दोबारा जांच और सीसीटीवी फुटेज से सामने आया कि डॉ. नवनीत ने बिना शारीरिक परीक्षण के पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की थी।

कोर्ट की टिप्पणी: जीवन और गरिमा महत्वपूर्ण

सीजेएम कालूराम ने कहा कि शव का परीक्षण किए बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाना गंभीर अपराध है। यह न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने वाला और समाज के नैतिक मूल्यों के खिलाफ है। हर व्यक्ति का जीवन और उसकी गरिमा महत्वपूर्ण है।

अब चलेगा ट्रायल

कोर्ट द्वारा प्रसंज्ञान लेने के बाद अब डॉ. नवनीत के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। कोर्ट ने सम्मन जारी कर डॉक्टर को पेश होने का आदेश दिया है, जिसके बाद ट्रायल चलेगा।

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