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जसरापुर क्षेत्र में नवविवाहिताएं कर रही गणगौर पूजा:सहेलियों संग कुओं से पानी लाकर गा रही पारंपरिक गीत


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जसरापुर क्षेत्र में नवविवाहिताएं कर रही गणगौर पूजा:सहेलियों संग कुओं से पानी लाकर गा रही पारंपरिक गीत

जसरापुर क्षेत्र में नवविवाहिताएं कर रही गणगौर पूजा:सहेलियों संग कुओं से पानी लाकर गा रही पारंपरिक गीत

खेतड़ी : खेतड़ी उपखंड के जसरापुर और आसपास के गांवों में इन दिनों गणगौर पर्व को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। नवविवाहिताएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गणगौर माता की पूजा-अर्चना कर रही हैं।

शीतला अष्टमी के दिन मिट्टी से गणगौर की प्रतिमाएं बनाने के बाद प्रतिदिन सुबह विधि-विधान से गणगौर माता की पूजा की जाती है। इस पर्व में नवविवाहिताएं अपनी सहेलियों और परिवार की महिलाओं के साथ मिलकर श्रद्धापूर्वक आराधना करती हैं। वे परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं।

परंपरा के अनुसार, दोपहर के समय प्रतिदिन अलग-अलग कुओं से पानी लाकर गणगौर माता को अर्पित किया जाता है। युवतियां सिर पर कलश रखकर समूह में पारंपरिक गीत गाते हुए कुओं तक जाती हैं और वहां से जल लाकर माता को चढ़ाती हैं।

रात को निकलती हैं बंदोरी

वहीं, रात्रि के समय ‘बंदोरी’ निकाली जाती है, जिसमें महिलाएं और युवतियां पारंपरिक लोकगीत गाते हुए पूरे मोहल्ले में घूमती हैं। यह उत्सव गांव में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।

शनिवार को गणगौर पूज रही अनुराधा जांगिड़ अपनी सहेलियों और परिवार की महिलाओं के साथ गांव के कुएं से पानी लेकर गीत गाते हुए घर पहुंचीं। इस दौरान महिलाओं ने उत्साहपूर्वक पारंपरिक गणगौर गीत गाते हुए पूजा-अर्चना की।

गांव के विभिन्न मोहल्लों में प्रतिदिन अलसुबह “गौर ए गणगौर माता खोल किवाड़ी…” जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई देती है। इन दिनों पूरे गांव में गणगौर पर्व को लेकर धार्मिक आस्था, उल्लास और लोक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिल रही है।

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