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झुंझुनूं रोडवेज डिपो बना मिसाल, एक वर्ष में घाटे से मुनाफे तक का सफर


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झुंझुनूं रोडवेज डिपो बना मिसाल, एक वर्ष में घाटे से मुनाफे तक का सफर

जनवरी 2025 के भारी घाटे से उबरकर जनवरी 2026 में करोड़ों की कमाई, बेहतर प्रबंधन और रणनीति से बदली डिपो की आर्थिक तस्वीर

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अंसार मुज्तर

झुंझुनूं। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के झुंझुनूं डिपो ने बेहतर प्रबंधन और प्रभावी रणनीति के दम पर अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार करते हुए मिसाल कायम की है। जनवरी 2025 में जहां डिपो को भारी घाटे का सामना करना पड़ा था, वहीं जनवरी 2026 में डिपो ने करोड़ों रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर अपनी आर्थिक तस्वीर बदल दी।

डिपो के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 में झुंझुनूं डिपो की कुल आय 4 करोड़ 43 लाख 90 हजार 290 रुपये रही थी, जबकि खर्च 5 करोड़ 66 लाख 31 हजार 710 रुपये रहा। इस प्रकार आय से अधिक खर्च होने के कारण डिपो को 1 करोड़ 22 लाख 41 हजार 420 रुपये का घाटा उठाना पड़ा था।

लेकिन जनवरी 2026 में स्थिति पूरी तरह बदल गई। इस दौरान डिपो ने 5 करोड़ 57 लाख 10 हजार 798 रुपये की आय अर्जित की, जबकि खर्च को नियंत्रित रखते हुए 4 करोड़ 65 लाख 66 हजार 840 रुपये तक सीमित रखा गया। खर्च निकालने के बाद डिपो को 1 करोड़ 5 लाख 52 हजार 263 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।

बेहतर प्रबंधन से बदली स्थिति

डिपो प्रबंधक गिरिराज स्वामी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में प्रशासन द्वारा कई सुधारात्मक कदम उठाए गए, जिनका सकारात्मक प्रभाव डिपो की आय पर पड़ा। बसों के बेहतर संचालन, टिकट व्यवस्था में सुधार, यात्रियों की संख्या बढ़ने और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण से आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

मुख्यालय के निर्देशों का मिला लाभ

उन्होंने बताया कि मुख्यालय के निर्देशानुसार डिपो में कई सुधार किए गए। बसों का समय पर संचालन सुनिश्चित किया गया और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी हुई।

यात्रियों की संख्या बढ़ने से आय में वृद्धि

पिछले कुछ महीनों में रोडवेज बसों के संचालन में सुधार होने से यात्रियों का भरोसा बढ़ा और अधिक लोग बसों से यात्रा करने लगे। ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों तक बस सेवाओं के बेहतर संचालन से भी आय में वृद्धि हुई।

खर्चों पर विशेष नियंत्रण

डिपो प्रशासन ने आय बढ़ाने के साथ-साथ खर्चों को नियंत्रित करने पर भी विशेष ध्यान दिया। अनावश्यक खर्चों में कटौती की गई और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया गया। ईंधन की खपत पर निगरानी तथा बसों के तकनीकी रखरखाव को बेहतर बनाकर खर्च कम किया गया।

कर्मचारियों के सहयोग से मिली सफलता

डिपो की इस सफलता में कर्मचारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया, जिससे बसों का संचालन सुचारू रूप से चलता रहा।

अन्य डिपो के लिए बना उदाहरण

झुंझुनूं डिपो की यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य डिपो के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है। एक वर्ष में घाटे से उबरकर करोड़ों रुपये की शुद्ध आय अर्जित करना यह साबित करता है कि सही प्रबंधन और रणनीति से सरकारी संस्थानों को भी लाभ में लाया जा सकता है।

डिपो प्रबंधक गिरिराज स्वामी ने कहा कि आने वाले समय में भी इसी प्रकार के प्रयास जारी रखे जाएंगे, ताकि आय में और वृद्धि हो तथा यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में जहां डिपो को 1 करोड़ 22 लाख 41 हजार 420 रुपये का घाटा हुआ था, वहीं जनवरी 2026 में 1 करोड़ 5 लाख 52 हजार 263 रुपये की शुद्ध आय अर्जित करना डिपो की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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