झुंझुनूं में थाने से आकर फिर टोल पर बैठे ग्रामीण:60 से 20 किमी के दायरे में टोल फ्री करने की मांग; धरना जारी
झुंझुनूं में थाने से आकर फिर टोल पर बैठे ग्रामीण:60 से 20 किमी के दायरे में टोल फ्री करने की मांग; धरना जारी
झुंझुनूं : झुंझुनूं-राजगढ़ स्टेट हाईवे पर धनूरी टोल प्लाजा पर धरने के दौरान पुलिस कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। रिहाई के बाद देर रात ग्रामीणों ने टोल बंद कर दिया और 60 किलोमीटर दूरी नियम व 20 किलोमीटर दायरे में टोल फ्री की मांग दोहराई। शाम को हुई कार्रवाई के बाद करीब 13-15 लोगों को थाने ले जाया गया, जिन्हें देर शाम रिहा कर दिया गया। इसके बावजूद ग्रामीण दोबारा टोल पर जुट गए।
शाम को धरना स्थल से हटाया
अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे ग्रामीण धनूरी टोल प्लाजा पर प्रदर्शन कर रहे थे। शाम के समय पुलिस ने पहुंचकर धरना स्थल खाली कराया। इस दौरान मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बनी और पुलिस ने करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे और बिना पूर्व सूचना पुलिस ने कार्रवाई की।

हिरासत में लिए गए प्रमुख नाम
कार्रवाई के दौरान जिन लोगों को हिरासत में लिया गया, उनमें किसान नेता अरविन्द गढ़वाल, महिपाल पूनिया, अजीत सिंह, शाहिद खान, देवकीनंदन बसेरा, तौफीक चैनपुरा, सुरेन्द्र सिलाईच, जगमाल, शीशराम सरावग, पंकज गुर्जर, अनीश धायल, मंजूर खान, रमेश राहड़, राजू फौजी और अमित शेखावत शामिल थे। जन दबाव के बाद देर शाम सभी को रिहा कर दिया गया।
क्या हैं ग्रामीणों की मांगें
ग्रामीणों का विरोध टोल प्लाजा की स्थापना और संचालन नियमों को लेकर है। उनका कहना है कि दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम 60 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए, जबकि लांबोर बड़ी और धनूरी टोल के बीच दूरी करीब 43 किलोमीटर है। वे यह भी मांग कर रहे हैं कि टोल से 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के वाहनों को पूरी तरह टोल फ्री किया जाए। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के समय 16,700 पौधे लगाने का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ।
देर रात दोबारा शुरू हुआ धरना
रिहाई के बाद ग्रामीण फिर से एकजुट हुए और देर रात भारी संख्या में धनूरी टोल प्लाजा पर पहुंच गए। विरोध के तौर पर टोल बूथ बंद करवा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
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