चारावास में ग्रामीणों ने आवारा कुत्तों से राष्ट्रीय पक्षी मोर को बचाया: वन विभाग ने किया रेस्क्यू, उपचार के बाद अब स्वस्थ
चारावास में ग्रामीणों ने आवारा कुत्तों से राष्ट्रीय पक्षी मोर को बचाया: वन विभाग ने किया रेस्क्यू, उपचार के बाद अब स्वस्थ
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : विजेन्द्र शर्मा
खेतड़ी : खेतड़ी उपखंड के जसरापुर क्षेत्र के चारावास गांव के मेघवाल मोहल्ला में आवारा कुत्तों ने भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। मोर पर हमला होते देख आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और साहस का परिचय देते हुए कुत्तों को भगाया। घायल अवस्था में मोर उड़ने में असमर्थ था और जमीन पर ही बैठा हुआ था, जिससे उसकी स्थिति गंभीर प्रतीत हो रही थी। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए मोर को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उसकी निगरानी की।
घटना की सूचना चारावास निवासी पंकज कल्याण ने तुरंत वन विभाग जसरापुर को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंची और घायल मोर का रेस्क्यू किया। वन विभाग के फॉरेस्टर जितेंद्र, वन मित्र जयमल खटाणा और महेंद्र ने सावधानीपूर्वक मोर को अपने संरक्षण में लिया और उपचार के लिए जसरापुर स्थित वन विभाग की नर्सरी में भिजवाया।वनरक्षक ओमप्रकाश डोई ने बताया कि घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को वन विभाग की नर्सरी में लाकर उसका प्राथमिक उपचार किया गया तथा उसकी नियमित निगरानी की गई। विभाग की देखरेख और उपचार के बाद अब मोर पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और पुनः उड़ने लगा है। उन्होंने बताया कि मोर के पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह सामान्य जीवन जी सके।
इस दौरान ग्रामीणों ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी जागरूकता और संवेदनशीलता का परिचय दिया। मौके पर अनिल कुमार लाइनमैन, जितेंद्र कल्याण, रणसिंह, राजपाल कल्याण, अनिल कल्याण, मनीष कुमार, अंकित, अजीत सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ग्रामीणों ने वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर उपचार मिलने से राष्ट्रीय पक्षी मोर की जान बच सकी।ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या वन्यजीवों के लिए खतरा बनती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और वन्यजीव सुरक्षित रह सकें।
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