बुधगिरी मढी पर महाशिवरात्रि का लक्खी मेला:लाखों श्रद्धालु करेंगे दर्शन, ढप्प मंडलियां करेंगी फाल्गुनी आगाज
बुधगिरी मढी पर महाशिवरात्रि का लक्खी मेला:लाखों श्रद्धालु करेंगे दर्शन, ढप्प मंडलियां करेंगी फाल्गुनी आगाज
फतेहपुर : बुधगिरी मढी पर रविवार को महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर लक्खी मेले का आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक स्थल पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, जिसमें पूरे परिसर को आकर्षक इलेक्ट्रॉनिक रोशनी से सजाया जा रहा है। हाईवे से मंदिर तक और घडवा जोहड़ा से मुख्य भवन तक साज-सज्जा का कार्य तेजी से जारी है। इससे मढी परिसर एक दिव्य स्वरूप में दिखाई देगा।
बैठक में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियों सौंपी गई
मढी के पीठाधीश्वर महंत दिनेशगिरी की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें यातायात, आवास, मेला प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न समितियों का गठन कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। बुधगिरी बालाजी मंदिर के सामने खुले मैदान में सैकड़ों स्टॉल लगाए गए हैं।
कल बुधगिरी देव का महानिर्वाण दिवस
महंत दिनेशगिरी ने बताया कि संत बुधगिरी को लोकदेवता का दर्जा प्राप्त है और वे परम गौभक्त थे। लगभग 220 वर्ष पूर्व महाशिवरात्रि के दिन ही संत बुधगिरी ने जीवित समाधि ली थी। इस कारण यह दिन उनका महानिर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। बुधगिरी की मढी पर माता हिंगलाज का मंदिर भी स्थित है, जिसे देश का पहला मंदिर माना जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु भगवान शिव, बुधगिरी महाराज और माता हिंगलाज के दर्शन कर देश में शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।
फतेहपुर-लक्ष्मणगढ़-रामगढ़ उपखंड का एकमात्र लक्खी मेला
फतेहपुर कस्बे के साथ-साथ रामगढ़, लक्ष्मणगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु माता हिंगलाज के दर्शन करने और महंत दिनेशगिरी से आशीर्वाद लेने पहुंचेंगे। यह फतेहपुर-लक्ष्मणगढ़-रामगढ़ उपखंड का एकमात्र लक्खी मेला है। शेखावाटी क्षेत्र के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों जैसे सूरत, मुंबई और कोलकाता सहित अन्य शहरों से भी सैकड़ों श्रद्धालु इस मेले में भाग लेने आते हैं।
ढप्प मंडलियां करेंगी फाल्गुनी महीने का शुभारंभ
महाशिवरात्रि के साथ ही ढप्पों की शुरुआत हो जाती है। बुधगिरी बाबा की मढ़ी पर ढप्प मंडलियां प्रस्तुति देकर फाल्गुनी महीने का आगाज करती हैं। यहां प्रस्तुति देने के बाद ही शहरों और गांवों में ढप्प कार्यक्रमों की शुरुआत मानी जाती है। लोक वाद्यों-ढप्प, चंग और अलगोजा की मधुर धुनों पर कलाकार फाल्गुनी रस बिखेरेंगे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग जाएगा।
सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था
लक्खी मेले को देखते हुए पुलिस एवं प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की गई है। हाईवे पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। कोतवाली, सदर थाना और आरएसी के जवान तैनात रहेंगे, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और मेला शांतिपूर्ण व सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
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