श्रीमाधोपुर में देशव्यापी हड़ताल का असर:मजदूरों ने कामकाज बंद कर केंद्र सरकार की नीतियों का किया विरोध
श्रीमाधोपुर में देशव्यापी हड़ताल का असर:मजदूरों ने कामकाज बंद कर केंद्र सरकार की नीतियों का किया विरोध
श्रीमाधोपुर : देशभर की ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर 12 फरवरी को श्रीमाधोपुर में भी देशव्यापी हड़ताल का असर देखा गया। चतुर्थ श्रेणी सहित विभिन्न विभागों के मजदूरों ने कामकाज बंद कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अपनी मांगें रखीं।
हड़ताल के दौरान मजदूरों ने चार लेबर कोड निरस्त करने, श्रम शक्ति नीति–2025 वापस लेने और ड्राफ्ट बिजली संशोधन बिल–2025 रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने और मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी बहाल करने की भी मांग उठाई गई।
मजदूरों ने ठेका प्रथा समाप्त करने, समान काम के लिए समान वेतन लागू करने, ऑपरेशन व मेंटीनेंस कार्यों की आउटसोर्सिंग बंद करने तथा फिक्स टर्म रोजगार की जगह स्थायी नियुक्ति की भी मांग रखी। सलाहकार ओमप्रकाश यादव ने बताया कि बैंक और एलआईसी सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी देशभर में हड़ताल पर रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड लागू करने से मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं।
किसान नेता पूरन सिंह कुड़ी ने कहा कि मजदूरों और किसानों ने संयुक्त रूप से इस हड़ताल को सफल बनाया। उन्होंने घोषणा की कि सरकार की नीतियों के विरोध में गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।इस दौरान कैलाश सामोता, शिवराम लांबा, राजेंद्र सैनी, भूपेंद्र सिंह, सुरेंद्र, भवानी जाखड़, सुरेंद्र कुमार, शंकर लाल, रोहिदाश, जगदीश, दिलीप कुमार और प्रमोद कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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