रात देर तक चला जलसा, जिक्र-ए-इलाही पर डाली रोशनी
शहर काजी अहमद अली शाह ने बताया,मां-बाप की सेवा ही असली जन्नत
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय स्थित भरतिया कुआं के सामने पठान चौक पर मरहूम हाजी नासर पठान कमेटी की ओर से रात्रिकालीन जलसे का आयोजन किया गया, जो देर रात तक चला। जलसे में नात-ए-पाक, तकरीर और जिक्र-ए-इलाही के जरिए दीन व इंसानियत का पैगाम दिया गया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से मुंबई (महाराष्ट्र) से तशरीफ लाए बेहतरीन आवाज के मालिक नात ख्वां मोहम्मद आमिर रजा रिज़वी ने “तू कुजा व हसनेन के नाना हैं” सहित कई मशहूर नातें पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।
मौलाना जमील अहमद अशरफी बीकानेरी ने “लब पर नाते पाक का नगमा कल भी था और आज भी है” कलाम पेश किया। वहीं मौलाना तुफैल अहमद अशरफी ने “खुदा का जिक्र करें और जिक्रे मुस्तफा न करें, हमारे मुंह में ऐसी जुबां खुदा न करें” कलाम सुनाकर अकीदतमंदों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
मां-बाप की सेवा ही सबसे बड़ी इबादत
मौलाना अंसार आलम अशरफी ने नबी-ए-पाक की सीरत पर विस्तार से बयान किया। शहर काजी अहमद अली शाह ने जिक्र-ए-इलाही पर रोशनी डालते हुए कहा कि मां-बाप से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। उनकी खिदमत ही असली जन्नत है और इंसान को सबसे पहले अपने वालिदैन की इज्जत और सेवा करनी चाहिए।
काजी अल्ताफ हुसैन एवं काजी हारून भाटी ने भी नातिया कलाम पेश किए। जलसे के अंत में मौलाना अंसार आलम अशरफी एवं शहर काजी अहमद अली शाह ने नबी की शान में दुरूदो-सलाम पढ़ा तथा मुल्क-ए-हिंदुस्तान में अमन, चैन और भाईचारा कायम रहने की दुआ की।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे अकीदतमंद
इस मौके पर कॉम काजियाना के पूर्व सदर जाकिर झारियावाला, चूरू जिला अंजुमन अल शबाब के जिलाध्यक्ष जमील चौहान, शेर अली, तय्यब पठान, अली पठान, तौफीक झारियावाला, मोहम्मद, गुलाम मुस्तफा, हुसैन सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद देर रात तक जलसागाह में मौजूद रहे।
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