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Covid-19जनमानस शेखावाटी संवाददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर जारी गणतंत्र दिवस सम्मान सूची सामने आते ही चूरू में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 58 नामों की लंबी सूची, उपलब्धियों और सेवाओं के दावों के बीच एक भी अल्पसंख्यक नागरिक का नाम शामिल नहीं होना क्या महज़ संयोग है? या फिर यह सोच और चयन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न है?
क्या इस जिले में एक भी योग्य अल्पसंख्यक नागरिक नहीं था?
क्या देशभक्ति किसी धर्म की बपौती है?
क्या सेवा, प्रतिभा और समर्पण का मज़हब देखा जाता है?
जब सम्मान सूची में एक भी अल्पसंख्यक चेहरा नजर नहीं आता, तो यह केवल सूची नहीं रह जाती, बल्कि नीतियों और नीयत का आईना बन जाती है। भाजपा सरकार बार-बार “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई सवाल करती है – “सबका सम्मान कहाँ है?”
गणतंत्र दिवस सिर्फ़ तिरंगे के साथ फोटो खिंचवाने का दिन नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा को जीने का पर्व है। और संविधान बराबरी, न्याय और समावेश की बात करता है, भेदभाव की नहीं। यह मामला सिर्फ़ सम्मान सूची का नहीं, बल्कि न्याय और प्रतिनिधित्व की भावना का है। और याद रखिए-चुप्पी भी कई बार पक्षपात का रूप होती है।
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