[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

अजीम-ओ-शान जलसा-ए-दस्तारबंदी व दीनी तक़रीब सम्पन्न


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
टॉप न्यूज़फतेहपुरराजस्थानराज्य

अजीम-ओ-शान जलसा-ए-दस्तारबंदी व दीनी तक़रीब सम्पन्न

मदरसा नोमान बिन साबित, फतेहपुर शेखावाटी में इल्म, नूर और बरकतों की बयार

शेखावाटी की पाक सरज़मीं एक बार फिर इल्म, नूर और बरकतों की गवाह बनी, जब मदरसा नोमान बिन साबित, फतेहपुर शेखावाटी में अजीम-ओ-शान जलसा-ए-दस्तारबंदी व दीनी तक़रीब का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, सादगी और रूहानियत के साथ किया गया।

यह यादगार दीनी तक़रीब शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित हुई। यह कोई साधारण जलसा नहीं था, बल्कि उन दुआओं की क़बूलियत का ऐलान था, जो माँ-बाप की आँखों से निकलकर अल्लाह की बारगाह तक पहुँचीं।

10 नन्हे हाफ़िज़-ए-कुरान और 3 आलिमा बेटियों की शानदार कामयाबी

इस मुबारक मौके पर मदरसे के 10 बच्चों ने मुकम्मल कुरान पाक हिफ़्ज़ करने की सआदत हासिल की, जिनके सीने अब अल्लाह की किताब के अमीन बन चुके हैं। साथ ही 3 बच्चियों ने आलिमा बनकर यह साबित कर दिया कि बेटियाँ भी दीनी इल्म में उम्मत की रहनुमाई कर सकती हैं और कौम की उम्मीद बन सकती हैं।

संस्थापक मौलाना मुफ्ती शौकत खान क़ासमी का प्रेरणादायी संदेश

मदरसे के संस्थापक मौलाना मुफ्ती शौकत खान क़ासमी ने अपने संदेश में कहा—“हम बच्चों को केवल दीनी तालीम ही नहीं, बल्कि दुनियावी तालीम भी दे रहे हैं, ताकि ये बच्चे नेक इंसान बनें, समाज के बेहतर नागरिक बनें और अपनी कौम व मुल्क का मजबूत सहारा बन सकें।”

मौलाना क़ासमी फिजूलखर्ची से परहेज़, सादगी और इस्लाही सोच के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना है कि बरकत दिखावे में नहीं, बल्कि इख़लास और सादगी में होती है, और यही इस जलसे की आत्मा भी रही।

बेहतर इंतज़ाम, सादगी और मेहमाननवाज़ी

जलसे में आने वाले मेहमानों के लिए खाने-पीने की मुनासिब व्यवस्था एवं ठहरने की सादा लेकिन सुविधाजनक व्यवस्था की गई, जिससे सभी ने सुकून और इत्मीनान महसूस किया।

दुआओं और हौसला-अफ़ज़ाई से सजी शाम

बुज़ुर्गों, नौजवानों, अहबाब और विशेष रूप से माँ-बाप ने इस मुबारक तक़रीब में शिरकत कर—

  • हाफ़िज़ बनने वाले बच्चों के सिर पर दुआओं का हाथ रखा

  • आलिमा बनी बेटियों की हौसला-अफ़ज़ाई की

  • उनकी कामयाबी को अपनी कामयाबी मानकर अल्लाह की बारगाह में शुक्र अदा किया

मेहमानों की मौजूदगी बच्चों के लिए सिर्फ़ तालियाँ नहीं, बल्कि ज़िंदगी भर का हौसला और रहनुमाई बनी।

रूहानियत से भरा एक यादगार जलसा

इस जलसे ने नन्हे सितारों के उज्ज्वल मुस्तक़बिल की गवाही दी और दीनी कारवाँ का हिस्सा बनकर सभी ने अल्लाह की रहमतों और बरकतों को समेटा। यह तक़रीब शिरकत करने वालों के लिए फ़ख़्र और बच्चों के लिए ज़िंदगी भर की पूँजी बन गई। – मौलाना मुफ्ती शौकत खान क़ासमी, मेहनसर

Related Articles