मकर संक्रांति पर गौसेवा में बरतें विशेष सावधानी: तला हुआ और अत्यधिक मीठा भोजन गायों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
मकर संक्रांति पर गौसेवा में बरतें विशेष सावधानी: तला हुआ और अत्यधिक मीठा भोजन गायों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : विजेन्द्र शर्मा
खेतड़ी : मकर संक्रांति पर गौसेवा की परंपरा है, लेकिन अनजाने में की गई गलतियाँ गायों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। जसरापुर पशु चिकित्सालय के पशुचिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. योगेश आर्य ने बताया कि मकर संक्रांति पर गायों को तला हुआ और अत्यधिक मीठा भोजन खिलाना उनके पाचन तंत्र के लिए हानिकारक हो सकता है।आमतौर पर लोग गौसेवा के नाम पर गायों को गुड़, लापसी, पूरी, चावल और आटा खिलाते हैं। अक्सर एक ही गाय को मोहल्ले के कई लोग बार-बार गुड़, रोटी, आटा और मीठा दे देते हैं। इसी तरह, गौशालाओं में भी पुण्य के लिए एक साथ अधिक मात्रा में गुड़ या आटा डाल दिया जाता है। निराश्रित गायों को थैली समेत गुड़ या मीठा देना भी बड़ी गलती है।

तला हुआ और ज्यादा मीठा भोजन करने से गायों में एसिडोसिस, आफरा, अपच, दस्त और फैटी लिवर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। अधिक स्टार्चयुक्त आहार से रूमन में किण्वन बढ़ता है, जिससे लैक्टिक अम्ल का स्तर बढ़ जाता है और पीएच गिरने से एसिडोसिस की स्थिति उत्पन्न होती है।यह समस्या केवल मकर संक्रांति तक सीमित नहीं है। यदि निराश्रित गौवंश को लगातार तला हुआ, मीठा या बासी भोजन दिया जाए, तो उन्हें लंबे समय तक अपच, दस्त, फैटी लिवर और गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।गायों को मीठा भोजन देने से पहले उन्हें हरा और सूखा चारा मिलाकर खिलाना चाहिए। सारा मीठा या तला हुआ भोजन एक ही गाय को देने के बजाय, उसे गौशाला में रखे ड्रम या टोकरी में डालना बेहतर है, ताकि प्रबंधन द्वारा सभी गायों को अल्प मात्रा में वितरित किया जा सके।
गौसेवा के अन्य प्रभावी तरीके भी हैं। हरा चारा, संतुलित आहार की फीड प्लेट, खली और चापड़ खिलाकर भी पुण्य अर्जित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आसपास की बीमार और निराश्रित गायों का उपचार करवा कर भी सच्ची गौसेवा की जा सकती है।यदि मकर संक्रांति पर किसी गाय को तला हुआ या मीठा खाने से बीमार अवस्था में देखा जाए, तो उसे दो मुट्ठी मीठा सोडा देना चाहिए। आफरा की स्थिति में मीठे तेल में थोड़ा तारपीन का तेल मिलाकर पिलाने के बाद तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क कर उपचार करवाना आवश्यक है।
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