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झुुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी में अवैध खनन के खिलाफ आक्रोश:पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प; 3 थानों का जाप्ता लगा


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झुुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी में अवैध खनन के खिलाफ आक्रोश:पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प; 3 थानों का जाप्ता लगा

झुुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी में अवैध खनन के खिलाफ आक्रोश:पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प; 3 थानों का जाप्ता लगा

गुढ़ागौड़जी : झुंझुनूं जिले में अवैध और नियम के खिलाफ खनन का मुद्दा गरमाता जा रहा है। आरोप है कि लंबे समय से चल रहे विरोध के बावजूद प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे नाराज होकर बामलास और हुकूमपुरा गांवों के ग्रामीणों ने मंगलवार को गुढ़ागौड़जी तहसील कार्यालय का घेराव किया।

मंगलवार को ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारी जब तहसील परिसर पहुंचे तो उन्होंने मुख्य द्वार के भीतर प्रवेश करने का प्रयास किया। सुरक्षा कारणों के चलते पुलिस ने मुख्य गेट बंद कर दिया।

जनआक्रोश रैली में ट्रैक्टर पर चढ़े ग्रामीण और किसान
जनआक्रोश रैली में ट्रैक्टर पर चढ़े ग्रामीण और किसान

इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। गेट बंद होने के बाद ग्रामीण तहसील के मुख्य द्वार के सामने ही धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से रोकने के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। मौके पर उदयपुरवाटी, गोठड़ा और गुढ़ागौड़जी थानों से भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है।

15 दिनों से जारी है अनिश्चितकालीन धरना

ग्रामीण पिछले 15 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एडवोकेट जयंत मूंड और जेपी महला ने बताया कि अवैध खनन से न केवल क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का भी दोहन किया जा रहा है। ग्रामीण कई बार लिखित में शिकायत दे चुके हैं लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

  • नियम विरुद्ध संचालित खानों को तुरंत बंद किया जाए: जो खानें निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं कर रही हैं, उन पर ताला लगे।
  • भारी वाहनों पर रोक: खनन क्षेत्रों से गुजरने वाले ओवरलोड ट्रैक्टरों और ट्रकों से ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, उन पर अंकुश लगे।
  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।

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