लोयल के मान नगर में भीषण पेयजल संकट: मटके लेकर सड़कों पर उतरे ग्रामीण, असंतुलित जल वितरण से त्रस्त, चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
700–800 रुपये में टैंकर मंगवाने को मजबूर ग्रामीण, पानी की किल्लत में बगैर नहाए स्कूल जा रहे हैं बच्चे
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : विजेन्द्र शर्मा
खेतड़ी : खेतड़ी उपखंड के जसरापुर क्षेत्र के लोयल गांव की खोजियों की ढाणी स्थित मान नगर में बुधवार को भीषण पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। हाथों में मटके लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया और चेतावनी दी कि यदि जल्द नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हुई तो वे आगामी चुनावों का बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाई गई थी और 50-60 घरों में कनेक्शन भी दिए गए थे। हालांकि, आज तक इन घरों में पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची है। हवलदार इंद्र सिंह काजला, मनीराम काजला और संदीप लांबा ने यह जानकारी दी।

सरकारी दावों के विपरीत, मान नगर के निवासी आज भी पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं। ग्रामीणों को प्रति टैंकर 700-800 रुपए चुकाने पड़ते हैं और हर महीने तीन से चार टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया, टैंकर से आने वाले पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने और पशुओं को पिलाने सहित सभी घरेलू कार्यों के लिए किया जाता है। पानी की कमी के कारण बच्चों को दो-तीन दिन में एक बार नहलाना पड़ता है और कपड़े धोने में भी अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी को ‘घी की तरह’ इस्तेमाल करना उनकी मजबूरी बन गई है, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लोयल क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए तीन उच्च जलाशय (पानी की टंकियां) बनी हुई हैं, फिर भी व्यवस्था पूरी तरह विफल है। उनका कहना है कि मान नगर के लिए बनी टंकी में वाल्व न होने के कारण सारा पानी वापस लोयल गांव की ओर चला जाता है और मान नगर तक नहीं पहुंच पाता।
यह तकनीकी खामी वर्षों से अधिकारियों के संज्ञान में है, लेकिन इसे आज तक दूर नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया।
इस प्रदर्शन में शांति देवी, सोली देवी, राजबाला देवी, अनीता देवी, संदीप लांबा, मुन्नी देवी, धर्मपाल काजला (पंच), ओमप्रकाश जांगिड़, सुभाष काजला, हरि सिंह डूडी, प्रवीण काजला, सभाचंद लांबा, विजय सिंह काजला, सुनीता देवी, सोना देवी, पूनम देवी, मेनका देवी, प्रेम देवी और नितिन काजला सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
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