चूरू से उठी बदलाव की मांग, मुस्लिम जातियों को ओबीसी आरक्षण से बाहर करने की अपील
चूरू से उठी बदलाव की मांग, मुस्लिम जातियों को ओबीसी आरक्षण से बाहर करने की अपील
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय से राजस्थान राज्य में मूल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं सामाजिक न्याय की मूल भावना को सुरक्षित सखने के उद्देश्य से आर्यावर्त हिन्दू युवा सेना के चूरू जिला अध्यक्ष मनोज त्यागी ने आज राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग, जयपुर के चेयरमैन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि राजस्थान की ओबीसी सूची में वर्ष 1999 से 2013 के बीच धर्म के आधार पर शामिल की गई तथाकथित मुस्लिम जातियों को ओबीसी आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाए, क्योंकि मंडल आयोग की मूल संस्तुतियां सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित थीं, न कि धार्मिक या आर्थिक आधार पर। जिला अध्यक्ष मनोज त्यागी ने कहा कि ओबीसी आरक्षण का उद्देश्य उन वर्गों को आगे बढ़ना था, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक भेदभाव, तिरस्कार और असमानता का शिकार रहे हैं।
इस्लाम में जातिगत भेदभाव की अवधारणा न होने के बावजूद विभिन्न मुस्लिम वर्गों को अलग-अलग जातियों के नाम पर ओबीसी सूची में शामिल करना न केवल मंडल आयोग की भावना के विपरीत है, बल्कि यह मूल ओबीसी समाज के साथ अन्याय भी है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन मुस्लिम वर्गों को राजस्थान की ओबीसी सूची में शामिल किया गया है, उनमें से अधिकांश केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल नहीं हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बिना समुचित सामाजिक सर्वे और ठोस आंकड़ों के यह निर्णय लिया गया। इसका सीधा दुष्प्रभाव स्थानीय निकायों, पंचायती राज संस्थाओं एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ा है, जहां मूल ओबीसी वर्ग अवसरों से वंचित हो रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ वर्गों द्वारा ओबीसी के साथ-साथ ईडब्ल्यूएस आरक्षण का दोहरा लाभ लिया जाना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
आर्यावर्त हिन्दू युवा सेना ने मांग की है कि मुस्लिम समुदाय में कथित जाति आधारित सामाजिक पिछड़ेपन की निष्पक्ष जांच हेतु उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, राजस्थान की ओबीसी सूची का पुनरीक्षण कर तथाकथित मुस्लिम जातियों को बाहर किया जाए, तथा बिना सामाजिक भेदभाव वाले समुदाय को जातियों में बांटकर दिए जा रहे आरक्षण को तत्काल समाप्त किया जाए।संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र प्रजापति ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि मूल अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए है, जिसे अंत तक जारी रखा जाएगा।
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