जमीन से सिर्फ 7 फुट ऊंची बिजली-लाइन, जान का खतरा: दौड़ रहा 11 हजार वोल्ट का करंट; AEN बोले- मामले की जानकारी नहीं
जमीन से सिर्फ 7 फुट ऊंची बिजली-लाइन, जान का खतरा: दौड़ रहा 11 हजार वोल्ट का करंट; AEN बोले- मामले की जानकारी नहीं
सूरजगढ़ : झुंझुनूं के सूरजगढ़ क्षेत्र में आने वाले बलौदा गांव में बिजली की लाइनें लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं। गांव की गलियों में ये तार इतने नीचे लटके हुए हैं कि चलते समय अगर कोई व्यक्ति अपना हाथ भी ऊपर उठाए, तो वह सीधे इन तारों की चपेट में आ सकता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक ही खंभे पर 11,000 वोल्ट (11 KV) की दो-दो हाईटेंशन लाइनें लगी हुई हैं। इनमें से एक लाइन तो जमीन से सिर्फ 7 फुट की ऊंचाई पर है। इसका मतलब है कि एक सामान्य लंबाई का आदमी अगर हाथ बढ़ाए, तो वह सीधे मौत के करीब पहुंच सकता है। दूसरी लाइन भी जमीन से महज 10-11 फुट ऊपर ही है।
ये खतरनाक तार लोगों के घरों के बिल्कुल करीब से गुजर रहे हैं। ये बिजली की लाइनें लोगों के कमरों की खिड़कियों, रसोई की छतों और जहां पशु बंधे होते हैं, उन बाड़ों के एकदम पास हैं। ऐसे में गांव वालों को हर समय डर सताता रहता है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

महेन्द्र का झुलसा था शरीर
दो साल पहले गांव का महेन्द्र हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया था। महेंद्र बताता है कि उस दिन का मंजर याद कर रूह कांप जाती है। घर के काम के दौरान 11 हजार की लाइन ने मुझे खींच लिया। अस्पताल के बिस्तर पर महीनों मौत से जंग लड़ी, हाथ कटने की नौबत आ गई थी। आज मैं जिंदा तो हूँ, लेकिन विभाग की लापरवाही के जख्म शरीर पर हमेशा के लिए अंकित हो गए हैं। इस खौफनाक हादसे के बाद भी विभाग की नींद नहीं टूटी। महेन्द्र और उसके परिजनों ने दर्जनों बार दफ्तरों की चौखट पर पहुंचे, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
निगम की लापरवाही
पहले से एक लाइन गुजर रही थी, अधिकारियों ने उसी पुराने खंभे पर दूसरी 11 केवी लाइन भी डाल दी। हवा चलते ही दोनों लाइनें आपस में टकराती हैं, चिंगारियां घरों के आंगन में गिरती हैं।

ग्रामीण सुरेश बताते हैं कि एक बार तार टूटने से घर में रखा सूखा चारा जल गया।
लोगों का छतों पर चढ़ना हुआ बन्द
बलौदा के 20 से ज्यादा घरों में माताएं अपने बच्चों को छत पर जाने से रोकती हैं। बरसात के दिनों में तो पूरा गांव ‘इलेक्ट्रिक शॉक’ के डर से सहमा रहता है। लोहे की सीढ़ियां और रेलिंग करंट के डर से ‘अछूत’ हो गई हैं। ग्रामीण महिलाएं कहती हैं, “हवा चलती है तो डर लगता है कि कही कोई तार टूट कर नहीं गिर जाए।
जिम्मेदार बोले- ‘हमे पता नहीं’
जब सूरजगढ़ एईएन केदारमल से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है और जांच करवाएंगे।
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