मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड प्रतिनिधिमंडल ने की केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड प्रतिनिधिमंडल ने की केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात
नई दिल्ली : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के अपलोड से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में अपनी मांगों और सुझावों वाला एक विस्तृत ज्ञापन भी मंत्री को सौंपा।
उम्मीद पोर्टल पर अपलोडिंग की समस्या
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पंजीकृत वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर अपलोड करने के दौरान गंभीर तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, जिसके कारण लाखों संपत्तियाँ पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सकीं। बोर्ड का कहना है कि पहले से दर्ज संपत्तियों को पोर्टल पर चढ़ाने की जिम्मेदारी संबंधित वक्फ बोर्डों को दी जानी चाहिए थी और इस कार्य के लिए कम से कम दो वर्ष का समय आवश्यक था।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जो संपत्तियाँ अब तक पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सकी हैं, उनके लिए समय सीमा में कम से कम एक वर्ष का अतिरिक्त विस्तार दिया जाए। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, वर्तमान में तय की गई छह महीने की अवधि व्यावहारिक रूप से बहुत कम है और जमीनी स्तर पर इसे पूरा करना लगभग असंभव साबित हुआ है।
संशोधन, दबाव और समय सीमा का विवाद
बोर्ड के प्रतिनिधियों ने कहा कि वक्फ अधिनियम/उम्मीद अधिनियम में किए गए संशोधनों और धारा 3बी के तहत पोर्टल पर विवरण अपलोड करना अनिवार्य होने से मुस्लिम समुदाय, विशेषकर मुतवल्लियों, पर अत्यधिक दबाव और कठिनाई बढ़ी है। अपलोडिंग के दौरान बार-बार आने वाली तकनीकी खामियों के चलते पोर्टल पर सभी संपत्तियाँ दर्ज कर पाना संभव नहीं हो सका।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि समय सीमा की गणना को लेकर अधिनियम में उल्लिखित अवधि और पोर्टल के औपचारिक लॉन्च की तारीख के बीच स्पष्ट असमानता है। उम्मीद नियमावली और संबंधित घोषणा-पत्र 3 जुलाई 2025 को अधिसूचित किए गए, जबकि पोर्टल 6 जून 2025 को लॉन्च हुआ था, इसलिए पोर्टल लॉन्च की तारीख को अधिनियम के प्रभावी होने की तिथि मानना उचित नहीं बताया गया।
वक्फ बोर्डों द्वारा समय वृद्धि की मिसाल
प्रतिनिधिमंडल ने जानकारी दी कि पंजाब, मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान वक्फ बोर्डों को निर्धारित छह माह की समयसीमा में कार्य पूरा न कर पाने पर न्यायाधिकरण से समयवृद्धि लेनी पड़ी। प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि जब स्वयं वक्फ बोर्डों को अतिरिक्त समय की आवश्यकता पड़ी, तो जमीनी स्तर पर काम कर रहे मुतवल्लियों को भी व्यावहारिक समयसीमा मिलनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि अधिनियम में उल्लिखित प्रारंभिक छह महीने की अवधि में कम से कम एक वर्ष का अतिरिक्त विस्तार दिया जाए और बाद में जरूरत पड़ने पर ही न्यायाधिकरण से दोबारा समयवृद्धि मांगी जाए।
केंद्र सरकार की शक्ति और मंत्री का आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी याद दिलाया कि वक्फ अधिनियम/उम्मीद अधिनियम, 1995 की धारा 113 के तहत केंद्र सरकार को अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने का अधिकार प्राप्त है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि समय सीमा में यथोचित विस्तार इसी प्रावधान के तहत संभव है और इससे समुदाय व प्रशासन, दोनों का काम सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेगा।
मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वक्फ संपत्तियों की ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी इन समस्याओं का समाधान जल्द खोजा जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य
मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में बोर्ड के उपाध्यक्ष सैयद सादतुल्लाह हुसैनी, महासचिव मौलाना मोहम्मद फज़लुर रहीम मुजद्दिदी, कार्यकारी सदस्य एवं सांसद बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी, पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी, जमीयत उलेमा-ए-हिंद (दिल्ली) के महासचिव मुफ्ती अब्दुर रज़ीक तथा बोर्ड के सदस्य अधिवक्ता फ़ुज़ैल अहमद अय्यूबी, हकीम मोहम्मद ताहिर और नबीला जमी़ल शामिल थे। बैठक के संबंध में जारी बयान बोर्ड के कार्यालय सचिव डॉ. मोहम्मद वक़ार उद्दीन लतीफ़ी ने जारी किया।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19







Total views : 2038284


