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भरतपुर में ओबीसी आयोग का संवाद

राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर सुझाव, सर्वे कर तैयार होगी रिपोर्ट

भरतपुर : अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की ओर से सोमवार को नगर निगम सभागार में संभाग स्तरीय जनसंवाद कार्यक्रम हुआ। इसमें ओबीसी को स्थानीय निकाय व पंचायत राज संस्थाओं में वाजिब प्रतिनिधित्व देने को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से सुझाव लिए गए।

आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदनलाल भाटी ने कहा कि ओबीसी को राजनीतिक संरक्षण जरूरी है। आयोग स्वतंत्र रूप से सर्वे करवाएगा, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन का आंकलन किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

जिलेवार सर्वे की आवश्यकता
भाटी ने कहा कि कई जिलों में पिछड़ेपन के मापदंड अलग हैं, इसलिए प्रतिनिधित्व भी जिलेवार तय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वंचित तबके को न्याय दिलाना आयोग की प्राथमिकता है।

सदस्य सचिव अशोक जैन ने बताया कि सर्वे के लिए स्वतंत्र एजेंसी के साथ मोबाइल एप का भी उपयोग होगा ताकि डेटा सटीक और पारदर्शी रहे। कार्यक्रम में सीईओ मृदुल सिंह ने सुझावों का स्वागत किया।

इन मुद्दों पर आए सुझाव

  • जनसंख्या अनुपात के आधार पर ओबीसी का प्रतिनिधित्व बढ़े

  • जिलेवार पिछड़ेपन के अनुसार राजनीतिक आरक्षण तय हो

  • एससी-एसटी-ओबीसी के लिए जनसंख्या आधारित आरक्षण

  • मूल ओबीसी जातियों के लिए विशेष प्रावधान

  • अन्य राज्यों से विवाह कर आई समान जाति की महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व का लाभ

कौन रहे मौजूद
कार्यक्रम में सदस्य मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण, पवन मंडाविया, पूर्व सांसद रामस्वरूप कोली, जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा, प्रधान दीपा सिंह सोगरवाल, अतिरिक्त कलक्टर प्रशासन घनश्याम शर्मा, आयुक्त नगर निगम श्रवण विश्नोई, पूर्व विधायक टोडाभीम रमेश चंद मीणा सहित संभाग स्तरीय जनप्रतिनिधि और संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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