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एसीजेएम न्यायालय के आदेश से धानुका अस्पताल के डॉक्टर पर केस दर्ज, परिवादी ने किडनी निकालने की कोशिश और मीरपीट का लगाया आरोप


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एसीजेएम न्यायालय के आदेश से धानुका अस्पताल के डॉक्टर पर केस दर्ज, परिवादी ने किडनी निकालने की कोशिश और मीरपीट का लगाया आरोप

फतेहपुर कोतवाल पर नाबालिग को 8 घंटे बंधक बनाने का एफ आई आर में लगा गंभीर आरोप

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर

फतेहपुर : फतेहपुर के धानुका अस्पताल से जुड़े एक चिकित्सक और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। एसीजेएम (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) न्यायालय, फतेहपुर शेखावाटी के कड़े रुख और आदेश के बाद स्थानीय कोतवाली थाने में एक डॉक्टर व प्राइवेट कंपाउंडर सहित छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न संगीन धाराओं में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। इस पूरे प्रकरण में फतेहपुर के तत्कालीन कोतवाल महेंद्र मीणा की भूमिका भी गंभीर कानूनी सवालों के घेरे में आ गई है, जिन पर परिवादी की और से एक 17 वर्षीय नाबालिग को थाने में 8 घंटे अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने और आरोपियों को कथित रूप से अनुचित लाभ पहुंचाने का सनसनीखेज आरोप एफ आई आर में लगाया है।

​तत्कालीन कोतवाल पर लगाए गंभीर आरोप, रक्षक पर ही उठे सवाल?

न्यायालय में पेश इस्तगासे और दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस प्रशासन का वह कथित अमानवीय रवैया सामने आया है, जिसने पीड़ित के कानूनी अधिकारों को ताक पर रख दिया।

एफ आई आर रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि जब 17 वर्षीय नाबालिग परिवादी बीती 20 मई 2026 को दोपहर करीब 2 बजे अपने साथ हुई कथित ज्यादती की शिकायत लेकर कोतवाली थाने पहुंचा, तो न्याय मिलना तो दूर, उसकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई।

एफ आई आर में ​आरोप है कि फतेहपुर थानाधिकारी (कोतवाल) महेंद्र मीणा ने नाबालिग की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय उसे थाने के ही एक कमरे में बंद कर दिया। एफ आई आर में बताया कि परिवादी को दोपहर 2 बजे से लेकर रात 10 बजे तक, यानी करीब 8 घंटे तक कथित रूप से अवैध अभिरक्षा (बंधक) में रखा गया। एफआईआर में यह संगीन आरोप भी लगाया गया है कि फतेहपुर थानाधिकारी और नामजद डॉक्टर आबिद खत्री के बीच कथित सांठगांठ थी, जिसके चलते कोतवाल ने कथित रूप से दबाव बनाकर एक कोरे कागज पर नाबालिग के हस्ताक्षर करवाए और बिना किसी मेडिकल परीक्षण के उसे रात में थाने से बाहर निकाल दिया।

किडनी निकालने की साजिश और जानलेवा हमले की वारदात का लगा आरोप
दर्ज मामले के अनुसार, मुख्य घटना 19 मई 2026 की रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। आरोप है कि धानुका अस्पताल के डॉक्टर आबिद खत्री और प्राइवेट कंपाउंडर अजीज खत्री (डॉक्टर आबिद के भाई ) ने नाबालिग को उसके घर के बाहर बुलाया और आते ही उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोपियों पर नाबालिग को घसीटकर जबरन एक वाहन में डालने का प्रयास करने का आरोप है।

​एफआईआर के मुताबिक, घटना के दौरान चिकित्सक द्वारा कथित रूप से यह कहा गया कि इसे रातों-रात जयपुर ले जाना है और इसकी किडनी निकालनी है। नाबालिग की चीख-पुकार सुनकर जब स्थानीय मोहल्ले के लोग (वसीम, फरहान, शोयब और जुनैद) बीच- बचाव करने पहुंचे, तो वहां मौजूद अन्य आरोपियों (रेहान, अमान, अशरफ और अरमान) ने उन पर जीआई पाइप, चमड़े के बेल्ट और डंडों से हमला कर दिया, जिससे वे घायल हो गए।

​एसपी से गुहार रही निष्फल, कोर्ट के आदेश पर खुली पुलिस की फाइल
कोतवाली पुलिस द्वारा सुनवाई न किए जाने से व्यथित पीड़ित पक्ष ने 21 मई 2026 को पुलिस अधीक्षक (एसपी), सीकर को भी लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई थी। जब पुलिस के उच्चाधिकारियों के स्तर से भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित परिवार ने अंततः न्यायपालिका की शरण ली।

​न्यायालय (एसीजेएम) फतेहपुर द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत आदेश जारी किए गए, जिसके बाद 1 जुलाई 2026 को फतेहपुर कोतवाली में आरोपी अजीज, डॉक्टर आबिद खत्री, रेहान, अमान, अशरफ और अरमान के खिलाफ बीएनएस की धारा 143(2), 191(2), 115(2), 126(2), 118(1), 117(2) और 332(c) के तहत मुकदमा (एफआईआर संख्या: 0183/2026) पंजीकृत किया गया है। मामले की अग्रिम तफ्तीश एएसआई भंवर सिंह को सौंपी गई है।

​डॉक्टर का पक्ष आबिद, धानुका अस्पताल, फतेहपुर
इस पूरे मामले और खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए डॉक्टर आबिद ने कहा, “ये सभी आरोप पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और गलत हैं। हमारे खिलाफ यह झूठा मुकदमा दर्ज करवाया गया है। हकीकत यह है कि इन लोगों के खिलाफ हमने पहले ही कानूनी मुकदमा दर्ज करवा रखा है। ये लोग आपराधिक व बदमाश प्रवृत्ति के हैं, और केवल मुझे व मेरे पेशे को बदनाम करने की नीयत से यह सब साजिश रच रहे हैं।”

पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले में जब हमारी टीम ने पुलिस का पक्ष जान ना चाहा और फतेहपुर थाना प्रभारी महेंद्र कुमार मीणा को कॉल किया तो उन्होंने कॉल रिसीव करना उचित नही समझा तथा व्हाट्सएप मेसेज का भी जवाब नही दिया गया

विधिक टिप्पणी :

यह समाचार पूरी तरह से न्यायालय के आदेश पर पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) में वर्णित आरोपों और दोनों पक्षों के बयानों पर आधारित है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की सत्यता और प्रामाणिकता की पुष्टि अभी पुलिस अनुसंधान और अंतिम न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। इस पूरे मामले में परिवादी की और से पैरवी एडवोकेट धर्मेंद्र सिंह शेखावत ने की हैं।

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