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झुंझुनूं जिला परिषद का इतिहास: 61 साल बाद कांग्रेस का वर्चस्व टूटा, 2020 में भाजपा ने जीतीं 20 सीटें


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झुंझुनूं जिला परिषद का इतिहास: 61 साल बाद कांग्रेस का वर्चस्व टूटा, 2020 में भाजपा ने जीतीं 20 सीटें

झुंझुनूं जिला परिषद का इतिहास: 61 साल बाद कांग्रेस का वर्चस्व टूटा, 2020 में भाजपा ने जीतीं 20 सीटें

झुंझुनूं : झुंझुनूं जिला परिषद में वर्ष 1959 से 2020 तक जिला प्रमुख की कुर्सी पर कांग्रेस नेताओं का दबदबा रहा। करीब छह दशक से अधिक समय तक चले इस राजनीतिक क्रम में शीशराम ओला ने लगभग 16 साल 6 महीने तक जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। बृजेन्द्र सिंह ओला भी दो बार इस पद पर रहे। दिसंबर 2020 में हुए जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने 35 में से 20 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया और हर्षिनी कुल्हरी जिला प्रमुख बनीं। इसके साथ जिला परिषद के नेतृत्व में कांग्रेस का लंबे समय से चला आ रहा वर्चस्व टूट गया।

श्रीराम बासोटिया से शुरू हुआ जिला प्रमुखों का सफर

झुंझुनूं जिला परिषद के जिला प्रमुखों का इतिहास 2 अक्टूबर 1959 को श्रीराम बासोटिया से शुरू हुआ। वे 1 मार्च 1961 तक पद पर रहे। इसके बाद शीशराम ओला ने जिम्मेदारी संभाली और 9 अगस्त 1977 तक जिला प्रमुख रहे। उनका कार्यकाल करीब 16 साल 6 महीने का रहा, जो उपलब्ध सूची में सबसे लंबा है।

शीशराम ओला के बाद 1977 से 1982 तक जिला परिषद का कामकाज प्रशासक के अधीन रहा। वर्ष 1982 में हरदेव सिंह भारू जिला प्रमुख बने। इसके बाद 1988 में बृजेन्द्र सिंह ओला ने पद संभाला और 1991 तक कार्यभार संभाला। वर्ष 1991 से 1995 तक फिर प्रशासक का दौर रहा। 1995 में प्रहलाद सिंह यादव जिला प्रमुख बने। उनके बाद मदन सिंह गिल ने करीब 11 महीने तक जिम्मेदारी निभाई।

बृजेन्द्र सिंह ओला दो बार बने जिला प्रमुख

फरवरी 2000 में बृजेन्द्र सिंह ओला दूसरी बार जिला प्रमुख बने और फरवरी 2005 तक पद पर रहे। इसके बाद डॉ. राजबाला ओला, हनुमान प्रसाद और सुमन रायला ने जिला परिषद का नेतृत्व किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस अवधि में कांग्रेस नेताओं का दबदबा बना रहा। दिसंबर 2020 में भाजपा की हर्षिनी कुल्हरी के जिला प्रमुख बनने के साथ यह राजनीतिक क्रम बदल गया।

2020 में भाजपा को 20 और कांग्रेस को मिलीं 13 सीटें

दिसंबर 2020 के जिला परिषद चुनाव में कुल 35 सीटों में से भाजपा ने 20 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 13 सीटें मिलीं, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

चुनाव परिणाम

  • भाजपा — 20 सीटें
  • कांग्रेस — 13 सीटें
  • निर्दलीय — 2 सीटें
  • कुल — 35 सीटें

वार्ड-7 से जीतकर जिला प्रमुख बनीं हर्षिनी कुल्हरी

हर्षिनी कुल्हरी ने भाजपा के टिकट पर वार्ड नंबर 7 से चुनाव लड़ा था। यह सीट अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित थी। कुल्हरी को 13,910 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी उषा को 10,880 वोट मिले। इस तरह कुल्हरी ने 3,030 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

जिला प्रमुख के चुनाव में भी कुल्हरी को बहुमत मिला। उन्हें 26 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की अंजू कस्वा को 9 वोट मिले। इसके बाद हर्षिनी कुल्हरी जिला प्रमुख चुनी गईं और झुंझुनूं जिला परिषद में भाजपा को पहली बार नेतृत्व का अवसर मिला।

ओला परिवार के तीन नाम दर्ज

झुंझुनूं जिला परिषद के इतिहास में ओला परिवार की भी अहम भूमिका रही। शीशराम ओला ने लंबे समय तक जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली, जबकि बृजेन्द्र सिंह ओला दो बार इस पद पर रहे। डॉ. राजबाला ओला भी 2005 से 2010 तक जिला प्रमुख रहीं। इस तरह उपलब्ध सूची में ओला परिवार के तीन नाम दर्ज हैं।

तथ्य संबंधी ध्यान दें: खबर में जिला प्रमुखों के कार्यकाल और कांग्रेस के वर्चस्व को लेकर दिए गए विवरण को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक सूची से मिलान कर लेना उचित होगा। 1959 से 2020 तक के पूरे 61 वर्षों में प्रशासकों के कार्यकाल भी शामिल रहे, इसलिए इसे लगातार 61 वर्ष तक कांग्रेस का शासन कहने के बजाय कांग्रेस नेताओं के लंबे वर्चस्व के रूप में लिखना अधिक सटीक है।

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