18 साल तक फरार रहा बीएड ठगी का आरोपी गिरफ्तार, देहरादून में बदल लिया था पता
सीकर में 23 मुकदमे दर्ज, विद्यार्थियों से 70 से 80 हजार रुपए प्रति छात्र लेने का आरोप; उम्र अधिक होने पर कोचिंग संस्थानों से छूटी नौकरी
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अशोक सिंह शेखावत
सीकर : बीएड करवाने के नाम पर विद्यार्थियों से लाखों रुपए की ठगी के मामले में 18 साल से फरार चल रहे आरोपी कल्याण सिंह (56) को पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर सीकर में 23 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने देहरादून का पता दर्ज करवाकर दस्तावेज तैयार करवा लिए थे। उसे 10 अक्टूबर को देहरादून के प्रेमनगर से गिरफ्तार किया गया और 11 अक्टूबर को सीकर लाया गया।
जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश की टीम और सीकर कोतवाली थाना पुलिस ने तकनीकी जानकारी और मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई की। पुलिसकर्मी एयरटेल फाइबर तकनीशियन बनकर आरोपी के घर पहुंचे और उसे पकड़ लिया। कोतवाली थाना प्रभारी सुनील कुमार जांगिड़ के अनुसार, आरोपी को जेल भेज दिया गया है। अब न्यायालय में अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान उसे पेश किया जाएगा।
2005 में सीकर में खोली थी कोचिंग
पुलिस के अनुसार, जालोर जिले के भोरटा निवासी कल्याण सिंह ने इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर कोचिंग संस्थानों में पढ़ाना शुरू कर दिया। जयपुर में कई संस्थानों में पढ़ाने के बाद वह 2005 में सीकर आया। यहां कुछ समय तक लक्ष्य कोचिंग में पढ़ाया और फिर अशोक विहार में जनरल एजुकेशन क्लासेज नाम से अपनी कोचिंग शुरू की।
इसी दौरान उसकी मुलाकात विकास सक्सेना से हुई। दोनों ने विद्यार्थियों को बीएड करवाने के नाम पर रकम लेना शुरू किया। आरोप है कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा, शिक्षक भर्ती सहित अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों से 70 से 80 हजार रुपए प्रति छात्र लिए गए, लेकिन उन्हें बीएड की डिग्री नहीं दिलवाई गई।
मुकदमे दर्ज होने के बाद हो गया था फरार
बताया गया कि संबंधित विश्वविद्यालय से संबद्ध करीब 50 महाविद्यालयों की मान्यता रद्द होने के बाद भी विद्यार्थियों से रकम ली जाती रही। वर्ष 2008 में विद्यार्थियों की ओर से मुकदमे दर्ज करवाए जाने के बाद विकास सक्सेना गिरफ्तार हो गया, जबकि कल्याण सिंह फरार हो गया। वर्ष 2008 से 2013 के बीच सीकर कोतवाली थाने में दोनों के खिलाफ 23 मुकदमे दर्ज हुए। इसके बाद कल्याण सिंह ने अपने गांव और रिश्तेदारों से संपर्क भी बंद कर दिया।
देहरादून से लेकर कई शहरों में करता रहा नौकरी
सीकर से फरार होने के बाद कल्याण सिंह परिवार के साथ देहरादून चला गया। पुलिस के अनुसार, उसने किराए के मकान के आधार पर वहां राशन कार्ड बनवाया और फिर देहरादून के पते पर अन्य दस्तावेज तैयार करवा लिए। इसके बाद वह अलग-अलग शहरों के कोचिंग संस्थानों में पढ़ाता रहा।
वर्ष 2013 तक देहरादून में विभिन्न कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने के बाद वह नोएडा और अलीगढ़ गया। अलीगढ़ में करीब तीन साल पढ़ाने के बाद 2017 में महाराष्ट्र के अमरावती में नौकरी की। इसके बाद चेन्नई, वाराणसी और अन्य शहरों के कोचिंग संस्थानों में भी पढ़ाया। कोरोना काल में नौकरी छूटने पर उसने देहरादून में रहकर घर से ऑनलाइन कक्षाएं लेना शुरू किया।
उम्र अधिक होने पर छूटी नौकरी, घर पर पढ़ाने लगा
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में उसने मध्य प्रदेश और फिर सिलीगुड़ी में कोचिंग संस्थानों में काम किया। बाद में श्री चैतन्य कोचिंग संस्थान से भी जुड़ा। वर्ष 2025 में उम्र अधिक होने के कारण उसकी नौकरी छूट गई। जून-जुलाई 2026 में रेजोनेंस कोचिंग में भी उसे करीब दो महीने बाद नौकरी से हटा दिया गया। इसके बाद वह देहरादून स्थित अपने मकान में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर गुजारा कर रहा था।
आरोपी ने देहरादून में ऋण लेकर मकान भी बनवाया था। पुलिस अब दर्ज मामलों के संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
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