शारदीय नवरात्रि विशेष: मनोबल बढ़ाते हैं नवरात्र, जानिए घटस्थापना का मुहूर्त और पूजन विधि
11 से 19 अक्टूबर तक होगी मां दुर्गा की आराधना, आचार्य अभिमन्यु पाराशर ने बताया कलश स्थापना का महत्व; नौ दिन के भोग और पूजा के रंग भी जानिए
शारदीय नवरात्रि : श्री जलाराम बापा ज्योतिष संस्थान शिमला (रजि.) के अध्यक्ष आचार्य अभिमन्यु पाराशर ने बताया कि शारदीय नवरात्रि केवल तिथियों की गणना नहीं, बल्कि आपके द्वार पर भक्ति, ऊर्जा और दिव्य चेतना के आगमन का पावन समय है। 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इन नौ दिनों में ब्रह्मांड की आद्याशक्ति आपके घर में प्रविष्ट होती है। इस साधना यात्रा की सबसे प्रमुख धुरी ‘घट’ और ‘कलश’ की स्थापना है, जो आपके गृहस्थ जीवन में साक्षात देवत्व को पधारने का संकल्प है।
घट स्थापना और पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अक्टूबर 2026)
`नवरात्रि के प्रथम दिन प्रातःकाल से ही शुभ वेला प्रारंभ हो जाती है। अपने समय नियोजन के अनुसार आप इन पावन मुहूर्तों में कलश स्थापित कर सकते हैं:-
चौघड़िया के अनुसार समय-चक्र
शुभ चौघड़िया (प्रातः एवं दोपहर):- सुबह 07:46 से 09:13 (चर), सुबह 09:13 से 10:41 (लाभ), सुबह 10:41 से दोपहर 12:08 (अमृत) तथा दोपहर 01:35 से 03:02 बजे तक (शुभ)।

स्थापना और पूजन की विधि
घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को पवित्र करके वहां लकड़ी की एक साफ चौकी रखें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। अब एक चौड़े मुंह का मिट्टी का पात्र लें। उसमें सबसे पहले शुद्ध मिट्टी की एक परत बिछाएं, फिर मुट्ठी भर जौ छिड़कें। इसके ऊपर पुनः मिट्टी और जौ की दूसरी परत लगाएं। अंत में हल्की मिट्टी डालकर ऊपर से जल की कुछ बूंदें छिड़कें ताकि मिट्टी में स्वाभाविक नमी बनी रहे।
तांबे अथवा मिट्टी के कलश में स्वच्छ जल भरें। कलश के कंठ पर पवित्र कलावा (मौली) लपेटें और उसके मुख्य भाग पर रोली से स्वास्तिक का शुभ चिह्न अंकित करें।
कलश के जल में थोड़ा गंगाजल, अक्षत और सिक्का डालें। अब कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पल्लव (पत्ते) सजाएं। एक जटाधारी नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर, उस पर कलावा बांधें और उसे पत्तों के बीचों-बीच इस तरह टिकाएं कि नारियल का मुख आपकी ओर हो। इस तैयार कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के ठीक मध्य में स्थापित कर दें।
दिव्य शक्तियों का आवाह्न
स्थापना पूर्ण होते ही हाथ जोड़कर मन को एकाग्र करें। सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का ध्यान करें। इसके पश्चात माता दुर्गा सहित नवग्रहों और समस्त देवी-देवताओं का आवाह्न करते हुए प्रार्थना करें: `•”हे मां जगदम्बा, हे समस्त दिव्य शक्तियों! इस पावन कलश में नौ दिनों के लिए विराजमान होकर हमारे घर-परिवार पर अपनी अनुकंपा और आशीर्वाद बनाए रखें।”
पूजन एवं साधना
षोडशोपचार पूजा: अब कलश का पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजन करें। रोली-चंदन से तिलक लगाएं, अक्षत और ताजे पुष्पों की माला अर्पित करें। कलश के समीप मौसमी फल, मिष्ठान और नैवेद्य सजाएं। सुगंधित धूप और शुद्ध घी का दीपक जलाकर मां की आरती करें।
विशेष ध्यातव्य: `इन नौ दिनों के दौरान जौ वाले पात्र में जल की पर्याप्त नमी बनाए रखें। जैसे-जैसे ये जौ अंकुरित होकर हरे-भरे लहराएंगे, वैसे-वैसे आपके जीवन और घर-परिवार में सुख, आरोग्य और आर्थिक समृद्धि का विस्तार होगा।
शारदीय नवरात्र के नौ दिन और नौ अलग-अलग भोग :
पहला दिन (मां शैलपुत्री) इस दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। उन्हें गाय के घी का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इससे रोग और कष्ट दूर होते हैं।
दूसरा दिन (मां ब्रह्मचारिणी) मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री का भोग लगाया जाता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
तीसरा दिन (मां चंद्रघंटा) इस दिन मां चंद्रघंटा को खीर का भोग लगाने से मानसिक शांति मिलती है और सभी दुख दूर होते हैं।
चौथा दिन (मां कूष्मांडा) मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाना चाहिए। इससे देवी खुश होती हैं और जीवन के सभी दुखों का नाश करती हैं।
पांचवां दिन (मां स्कंदमाता) मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। इससे सेहत अच्छी रहती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
छठा दिन (मां कात्यायनी) मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। इससे साधक की आकर्षण शक्ति बढ़ती है और रिश्ते मधुर होते हैं।
सातवां दिन (मां कालरात्रि) इस दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। उन्हें गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं। इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और भय से मुक्ति मिलती है।
आठवां दिन (मां महागौरी) मां महागौरी को नारियल का भोग लगाना बहुत शुभ होता है। इससे संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
नौवां दिन (मां सिद्धिदात्री) शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री को तिल का भोग लगाएं। इससे अचानक आने वाली विपत्तियों से सुरक्षा मिलती है।
नवरात्रि के नौ दिन किस रंग के कपड़े पहने :
पहले दिन – नवरात्रि के पहले दिन आपको नारंगी रंग के कपड़े पहनने चाहिए। नारंगी रंग को पहन कर पूजा करने से आपको बहुत सकारात्मक महसूस होगा।
दूसरे दिन – इस दिन सफ़ेद रंग के वस्त्र धारण करें। यह रंग आपको आत्मशांति और बेहतर महसूस करवाने में सहयोग करेगा।
तीसरे दिन – नवरात्रि के तीसरे दिन लाल रंग को दिनचर्या में जरूर शामिल करें। आप इस रंग का प्रयोग माता की पूजा के लिए भी कर सकते हैं क्योंकि लाल रंग माता को अतिप्रिय होता है।
चौथे दिन – गहरा नीला रंग नवरात्रि के चौथे दिन सबसे शुभ रहेगा। नीला रंग समृद्धि और शान्ति लाता है। इस रंग के वस्त्र पहनें और माता का ध्यान करें।
पांचवे दिन – पीले रंग के कपड़े पहनने से आप खुश और सकारात्मक महसूस कर सकते हैं। पीला एक नर्म और मन को खुशी देने वाला रंग है। यह आपका दिन अच्छा बनाएगा।
छठवें दिन – नवरात्रि के छठवें दिन हरा रंग पहनें। हरा रंग प्रकृति से जुड़ा होता है, यह सभी चीज़ों के फलदायी, शांतिपूर्ण और स्थिर होने का संकेत देता है। देवी की प्रार्थना करते समय हरा रंग पहनना, आपको शांति महसूस करवा सकता है।
सातवें दिन – इस दिन स्लेटी रंग पहनें। यह आपकी सोच को संतुलित करने में मदद करेगा। इसकी ऊर्जा से आप अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं।
आठवें दिन – नवदुर्गा पूजा के दौरान आठवें दिन बैंगनी रंग का उपयोग करें। इससे आपको समृद्धि और सफलता प्राप्त हो सकती है। इसलिए, अगर आप देवी मां का आशीर्वाद चाहते हैं, तो यह रंग अवश्य चुनें।
नौवें दिन – नवरात्रि के नौवें दिन आपको मोर वाला हरा रंग पहनना चाहिए। यह हरे और नीले रंग से मिलकर बनता है। यह रंग समृद्धि से जुड़ा होता है।
नवरात्र में दिन के अनुसार वस्त्रों के रंग अपनाने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी आस्था और सुविधा के अनुसार इन रंगों का चयन कर सकते हैं।
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