गुढ़ागौड़जी में अतिक्रमण हटाने पर व्यापारियों का धरना:बाजार बंद, बोले- 84 फीट तक खुद हटाएंगे, पूर्व विधायक का मिला समर्थन
गुढ़ागौड़जी में अतिक्रमण हटाने पर व्यापारियों का धरना:बाजार बंद, बोले- 84 फीट तक खुद हटाएंगे, पूर्व विधायक का मिला समर्थन
गुढ़ागौड़जी : गुढ़ागौड़जी कस्बे के मुख्य बाजार में स्टेट हाईवे-37 पर प्रस्तावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने धरना प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में व्यापारियों ने प्रशासन का विरोध करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
15 दिन का अल्टीमेटम दिया
प्रशासन ने राजस्थान हाईकोर्ट आदेश के पालन में सड़क चौड़ीकरण के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम जारी किया है। इसके तहत सड़क को लगभग 80 फीट चौड़ा किया जाना है, जिसके लिए दोनों ओर से अतिरिक्त भूमि खाली कराई जाएगी। धरने के बाद व्यापारियों ने तहसील परिसर पहुंचकर तहसीलदार कुलदीप भाटी को ज्ञापन सौंपा। वार्ता के दौरान व्यापारियों ने स्वेच्छा से सड़क सीमा के भीतर 84 फीट तक के कच्चे-पक्के अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी बताया कि टीनशेड सहित अस्थायी निर्माण दो दिन में हटाने का प्रयास किया जाएगा। तहसीलदार कुलदीप भाटी ने कहा कि व्यापारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने के बाद इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।


व्यापारी बोले- रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा
व्यापारियों का तर्क है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के यह कार्रवाई उनके रोजगार पर सीधा असर डालेगी। उनका कहना है कि कई दुकानदार सालों से यहां व्यवसाय कर रहे हैं, और अचानक की गई इस कार्रवाई से उनकी आजीविका पर संकट आ सकता है।
पूर्व विधायक बोले- व्यापारियों के हितों की अनदेखी
पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी के धरनास्थल पर पहुंचने से व्यापारियों के प्रदर्शन को बल मिला। उन्होंने व्यापारियों की समस्याएं सुनीं और कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन आवश्यक है, लेकिन व्यापारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
चौधरी ने आश्वासन दिया कि किसी भी स्थिति में स्थायी दुकानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, क्योंकि इससे बाजार की व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क सीमा के 84 फीट के भीतर अतिक्रमण हटाना है, लेकिन इसके बाहर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ स्वीकार्य नहीं होगी।
15 सदस्यीय समिति का गठन
इस आंदोलन को संगठित रूप देने और कानूनी पहलुओं की समीक्षा के लिए 15 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की तैयारी करेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा करना और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से इस समस्या का समाधान खोजना है।
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