साहित्यिक कार्यशालाएँ नये हस्ताक्षरों को आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर – शौक़ीन सीकरी
साहित्यिक कार्यशालाएँ नये हस्ताक्षरों को आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर - शौक़ीन सीकरी
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : सारस साहित्य संस्थान, चूरू द्वारा आज शाम नगर श्री सभागार में ग़ज़ल की बाबत कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता बनवारी लाल शर्मा ‘ख़ामोश’ ने की तथा ओमप्रकाश खींची ‘दिल’ सीकरी मुख्य अतिथि व सीकर से ही पधारे महावीर प्रसाद शर्मा ‘शौक़ीन’ विशिष्ट अतिथि रहे। मंचस्थ जन द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर और अगरबत्ती जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सरदारशहर से आयी गुड्डू जांगिड़ और रूपा जांगिड़ द्वारा सरस्वती वंदना के पश्चात् अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
संस्था की ओर से स्वागत उद्बोधन बुद्धमल सैनी ने कार्यशाला से ग़ज़ल की बारीकियाँ सीखने हेतु निवेदन किया। तत्पश्चात् रुड़की (उत्तराखंड) के शायर के.पी. अनमोल के पत्र का वाचन शायर पवन शर्मा भादरा द्वारा किया गया। मंचस्थ शायर शौक़ीन ने ग़ज़ल की बारीकियों को बड़े सरल और रोचक तरीकों से बताते हुए कहा कि ग़ज़ल की कोई भाषा नहीं होती हम हर भाषा में ग़ज़ल कह सकते हैं, साथ ही दिल सीकरी ने भी ग़ज़ल में वज़्न और मात्रा के प्रभाव को श्रोताओं के समक्ष रखा एवं श्रोताओं से पूछे गए सभी प्रश्नों का संतोषजनक जवाब दिया। गुड्डू व रूपा द्वारा ग़ज़ल गायन प्रस्तुति के पश्चात् अध्यक्ष ‘ख़ामोश’ चुरुवी ने उद्बोधन में कहा कि साहित्य के क्षेत्र में कार्यशाला रूपी बीज डालना मात्र साहित्य की सच्ची सेवा है।
संस्था की ओर से कुमार अनिल ‘रजन्यंश’ ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में चूरू क्षेत्र के कई ग़ज़ल लेखक, शायर व पाठक उपस्थित रहे जिनको ग़ज़ल की लेखन परम्पराओं का सानिध्य मिला। कार्यक्रम का संयोजन व मंच संचालन दीपक ‘कामिल’ ने किया।
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