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मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य के खिलाफ डॉक्टरों का काली पट्टी विरोध:पदनाम हटाने पर डॉक्टरों ने भेजे सामूहिक इस्तीफे, मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य के खिलाफ डॉक्टरों का काली पट्टी विरोध:पदनाम हटाने पर डॉक्टरों ने भेजे सामूहिक इस्तीफे, मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की

मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य के खिलाफ डॉक्टरों का काली पट्टी विरोध:पदनाम हटाने पर डॉक्टरों ने भेजे सामूहिक इस्तीफे, मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की

झुंझुनूं : झुंझुनूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज झुंझुनूं और बीडीके हॉस्पिटल में प्रशासनिक विवाद सामने आया है। सेवारत डॉक्टरों ने पदनाम हटाने के आदेशों के विरोध में काली पट्टी बांधकर काम किया, ईमेल से इस्तीफे भेजे और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामला पिछले 6 महीनों में बिना मंजूरी किए गए फैसलों, दुर्व्यवहार और भेदभाव से जुड़ा बताया जा रहा है।

मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में बढ़ा तनाव

कॉलेज और हॉस्पिटल में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सेवारत डॉक्टरों का कहना है कि प्रशासनिक फैसलों से कामकाज प्रभावित हो रहा है और माहौल खराब हुआ है।

संगठन ने प्रधानाचार्य के खिलाफ खोला मोर्चा

अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ अरिसदा ने कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. राकेश साबू पर तानाशाही रवैया अपनाने, नियमों के खिलाफ फैसले लेने और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। विरोध के तौर पर डॉक्टर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं।

पदनाम हटाने के आदेश से नाराजगी

डॉक्टरों का आरोप है कि पिछले 6 महीनों में 6 अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदनाम बिना सक्षम स्तर की मंजूरी के हटा दिए गए। उनका कहना है कि आदेश जारी करते समय नियमों की अनदेखी की गई।

ईमेल से भेजे गए इस्तीफे

पदनाम हटाने के विरोध में कई पदनामित डॉक्टरों ने एकजुट होकर ईमेल के जरिए अपने इस्तीफे प्रधानाचार्य को भेज दिए हैं। इससे कॉलेज और हॉस्पिटल का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

सेवारत चिकित्सक संघ जिला झुंझुनूं ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नाम विस्तृत ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में बताया गया कि कॉलेज की शुरुआत के समय जब एक भी शिक्षक नहीं था, तब सेवारत डॉक्टरों ने बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के सुबह शाम कक्षाएं लेकर कॉलेज को खड़ा किया।

एनएमसी निरीक्षण में निभाई अहम भूमिका

डॉक्टरों ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन के निरीक्षण के दौरान भी सेवारत चिकित्सकों की मेहनत से कॉलेज को मान्यता मिली थी। इसके बावजूद अब उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

विभागाध्यक्ष पद से हटाने का आरोप

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि अनुभवी चिकित्सकों को नियमों के खिलाफ विभागाध्यक्ष पद से हटाया गया और उन्हें अपमानित किया गया। साथ ही राजमेस सोसायटी के डॉक्टरों और सेवारत पदनामित डॉक्टरों के बीच भेदभाव की बात भी कही गई है।

वेतन भुगतान पर उठे सवाल

डॉक्टरों का आरोप है कि कुछ सोसायटी डॉक्टर उपस्थिति पंजिका में साइन नहीं करते और न ही उपस्थिति का सत्यापन होता है, फिर भी उनका पूरा वेतन निकाला जा रहा है।

जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

सेवारत डॉक्टरों ने सरकार से पूरे मामले की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। विरोध के चलते मेडिकल कॉलेज और बीडीके हॉस्पिटल में प्रशासनिक हालात पर सभी की नजर बनी हुई है।

जिला कार्यकारिणी (सेवारत चिकित्सक संघ, झुंझुनूं)

अध्यक्ष – डॉ. एस.ए जब्बार

उपाध्यक्ष – डॉ. सिद्धार्थ शर्मा

महासचिव – डॉ. राजेंद्र ढाका

प्रवक्ता – डॉ. विजय झाझड़िया

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