ना माने तो ये सरकार भी उसी तरह काले पन्ने बन जाएगी इतिहास के : शेखावत
राजस्थान के बजट में राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा की अनदेखी दुर्भाग्य की बात
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू: फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक राजेन्द्रसिंह शेखावत ने राजस्थान के बजट में राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा की अनदेखी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सारी उम्मीदों और विश्वास पर पानी फेर दिया है। शेखावत ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बाकी तो ठीक है परन्तु खुद राजस्थान के बजट में राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा का कहीं जिक्र नहीं किया गया है। इससे बड़े दुर्भाग्य की बात और क्या हो सकती है। शेखावत ने गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि क्या ये अनदेखी सरकार पर भारी नहीं पड़ेगी? इस संबंध में पीएम नरेंद्र मोदी जी को क्या जवाब देगी राजस्थान सरकार? होना तो ये चाहिए था कि इस बजट में कांग्रेस सरकार द्वारा वंचित रखी गई केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से प्रमाण पत्र प्राप्त राजस्थानी फीचर फिल्मों को अनुदान राशि जारी करने और ढाई साल में आई अन्य राजस्थानी फिल्मों को अनुदान राशि जारी करने की घोषणा की जाती।
साहित्य अकादमियों को बजट दिया जाता और राजस्थानी को राज भाषा बनाने की घोषणा होती।सरकार को मोदीजी का कहना मानना चाहिए, मोदीजी कह चुके हैं कि वंचितों को लाभान्वित करें, फिर सरकार इन वंचितों को क्यों भूल गई। इतिहास गवाह है कि राजस्थानी कला, साहित्य, भाषा और संस्कृति को उसका हक नहीं देने वाली सरकारों का कोई अतापता भी नहीं रहता है। पहले वाली सरकारों ने जो भूल की, वही भूल ये सरकार कर रही है। शेखावत ने कहा कि हम तो कह सकते हैं, माने तो सबके लिए ठीक ना माने तो ये सरकार भी उसी तरह काले पन्ने बन जाएगी इतिहास के।
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