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यूजीसी कानून में बदलाव के विरोध में सीकर कलेक्ट्रेट पर सवर्ण समाज का जोरदार प्रदर्शन


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यूजीसी कानून में बदलाव के विरोध में सीकर कलेक्ट्रेट पर सवर्ण समाज का जोरदार प्रदर्शन

आधे घंटे तक पुलिस से हुई नोकझोंक, राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत

सीकर : यूजीसी कानून में प्रस्तावित बदलाव के विरोध में मंगलवार को सीकर जिला कलेक्ट्रेट पर सवर्ण समाज की ओर से जोरदार प्रदर्शन किया गया। ब्राह्मण, राजपूत, अग्रवाल, कायस्थ सहित विभिन्न सवर्ण संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्य गेट पर धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच करीब आधे घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया। इसी दौरान कुछ युवा प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर चढ़ गए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। हालात बिगड़ते देख अतिरिक्त पुलिस जाप्ता मौके पर तैनात किया गया। कोतवाली थाना अधिकारी सुनील जांगिड़ की समझाइश के बाद स्थिति शांत हुई।

इसके पश्चात प्रदर्शनकारियों ने एडीएम रतन कुमार स्वामी को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम यूजीसी कानून में बदलाव के विरोध में ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन विप्र सेना के नेतृत्व में दिया गया।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सवर्ण समाज के नेताओं ने केंद्र सरकार पर जातिगत आधार पर समाज को विभाजित करने का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि देश में पहले से ही भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, एंटी रैगिंग नियम तथा एससी-एसटी एक्ट जैसे कानून मौजूद हैं, ऐसे में नए जातिगत प्रावधानों की आवश्यकता नहीं है।

नेताओं ने बताया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर रोक लगाई गई है, लेकिन यदि सरकार इसे जबरन लागू करने का प्रयास करती है तो सवर्ण समाज प्रदेश एवं देश स्तर पर व्यापक आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई सवर्ण छात्र जातिगत भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन झूठे मामलों में फंसाने वालों पर भी कठोर दंड का प्रावधान होना आवश्यक है।

नेताओं ने यह सवाल भी उठाया कि यदि ओबीसी वर्ग का छात्र एससी-एसटी वर्ग से भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान क्यों नहीं है। जातिगत भेदभाव को देश के लिए नासूर बताते हुए उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निर्दोषों को न्याय दिलाने की मांग की।

साथ ही यह भी मांग रखी गई कि नए कानून के तहत गठित की जाने वाली जांच समिति में सवर्ण समाज के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाए, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और कानून समानता की भावना पर आधारित हो, न कि जातिगत दृष्टिकोण पर। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग मौजूद रहे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

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