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आशा सहयोगिनियों ने घेरा कलेक्ट्रेट:कहा- “26 हजार मानदेय हमारा हक, शोषण बंद करे सरकार”गांधी चौक से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली


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आशा सहयोगिनियों ने घेरा कलेक्ट्रेट:कहा- “26 हजार मानदेय हमारा हक, शोषण बंद करे सरकार”गांधी चौक से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली

आशा सहयोगिनियों ने घेरा कलेक्ट्रेट:कहा- "26 हजार मानदेय हमारा हक, शोषण बंद करे सरकार"गांधी चौक से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली

झुंझुनूं : अपनी लंबित मांगों और अल्प मानदेय के खिलाफ आज जिलेभर की आशा सहयोगिनियों ने लामबंद होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गांधी चौक पर एकत्रित होकर सैकड़ों की संख्या में आशा सहयोगिनियों ने विशाल रैली निकाली, जो शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई जिला कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान आशा सहयोगिनियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

सड़कों पर उतरा ‘महिला शक्ति’ का सैलाब

सुबह से ही जिले के विभिन्न ब्लॉकों और गांवों से आशा सहयोगिनियां गांधी चौक पर जुटना शुरू हो गई थीं। हाथों में तख्तियां और नारों की गूंज के साथ जब यह रैली कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ी, तो शहर की रफ्तार थम सी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार की तमाम स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल पर उतारती हैं, लेकिन बदले में उन्हें ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान मानदेय दिया जा रहा है।

प्रमुख मांगें

4 सूत्रीय मांग पत्र प्रशासन को सौंपा है:

समान काम-समान वेतन: आशा सहयोगिनियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करते हुए इसे न्यूनतम 26,000/- रुपये प्रतिमाह किया जाए। साथ ही, हर साल महंगाई भत्ते के अनुरूप इसमें बढ़ोतरी का प्रावधान हो। सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सुरक्षा: राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर आशा सहयोगिनियों को भी रिटायरमेंट के समय 15 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि दी जाए, ताकि उनका बुढ़ापा सुरक्षित रह सके।

डिजिटल संसाधन की उपलब्धता: वर्तमान में लगभग सभी काम ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य कर दिए गए हैं। ऐसे में आशाओं ने मांग की है कि उन्हें सरकार की ओर से टैबलेट या लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएं ताकि कार्य में आ रही तकनीकी बाधाएं दूर हों। पदोन्नति में आरक्षण और आयु सीमा में छूट: महिला पर्यवेक्षक, आशा सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ANM भर्ती में अनुभवी आशा सहयोगिनियों को आरक्षण का लाभ मिले और अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान की जाए।

काम का बोझ भारी, पर जेब हमारी खाली

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रसव पूर्व जांच से लेकर टीकाकरण और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में आशा सहयोगिनियां दिन-रात जुटी रहती हैं। ऑनलाइन फीडिंग का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संसाधनों के नाम पर उनके पास कुछ नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा और आगामी समय में कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

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