काटली नदी की कोख से हटा ‘अवैध’ कब्जा:केड़ गांव में प्रशासन का महा-अभियान, 50 बीघा में खड़ी गेहूं की फसल पर चला ट्रैक्टर, हाईकोर्ट में देनी है रिपोर्ट
काटली नदी की कोख से हटा 'अवैध' कब्जा:केड़ गांव में प्रशासन का महा-अभियान, 50 बीघा में खड़ी गेहूं की फसल पर चला ट्रैक्टर, हाईकोर्ट में देनी है रिपोर्ट
झुंझुनूं : शेखावाटी की जीवन रेखा मानी जाने वाली काटली नदी के बहाव क्षेत्र को माफियाओं और अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुढ़ागौड़जी के केड़ गांव में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब तहसील प्रशासन का भारी अमला पुलिस जाब्ते के साथ नदी के पेटे में उतर गया।
प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए लगभग 50 बीघा जमीन पर अवैध रूप से उगाई गई गेहूं की फसल को ट्रैक्टरों से तहस-नहस कर बहाव क्षेत्र को साफ कर दिया। पकने वाली थी फसल, कानून ने फेरा पानी

केड़ गांव के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों ने करीब 50 बीघा भूमि पर कब्जा कर गेहूं की बुवाई कर रखी थी। फसल पूरी तरह लहलहा रही थी और कुछ ही दिनों में पककर तैयार होने वाली थी। ग्रामीणों को उम्मीद नहीं थी कि प्रशासन फसल कटने का इंतजार नहीं करेगा, लेकिन माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के आगे अफसरों ने एक न सुनी। तीन से चार ट्रैक्टरों को एक साथ चलाकर पूरी फसल को मिट्टी में मिला दिया गया। मौके पर मौजूद कुछ किसानों ने भावुक अपील भी की, लेकिन “कानून का पंजा” रुकने को तैयार नहीं था।
इस कार्रवाई की कड़वाहट और रफ्तार के पीछे मुख्य कारण हाईकोर्ट की सख्ती है। दरअसल, काटली नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर प्रशासन को कोर्ट में अपना जवाब पेश करना है। सूत्रों की मानें तो कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई थी। इसी जवाबदेही से बचने के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों की फौज ने गांव में डेरा डाल रखा है।
भारी पुलिस तैनात
जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, केड़ गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस का भारी जाब्ता तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि बहाव क्षेत्र में एक इंच भी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पैमाइश के दौरान सीमांकन के पत्थरों को फिर से दुरुस्त किया गया ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके।
नदी का रास्ता रोकना पड़ा महंगा
काटली नदी जो वर्षों से सूखे की मार झेल रही है, उसके प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को खेतों में तब्दील कर दिया गया था। जानकारों का कहना है कि यदि भविष्य में अच्छी बारिश होती है, तो ये अतिक्रमण पानी के रास्ते में बड़ी बाधा बन सकते थे। प्रशासन की इस कार्रवाई ने क्षेत्र के अन्य अतिक्रमणकारियों में भी दहशत पैदा कर दी है।
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