राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी 2026)
धर्म से परे आदर्श की यात्रा : जुल्फिकार जो विवेकानंदमय हो गया
शांत ढाणियों के बीच बसे छोटे से गांव भीमसर से निकले शोधकर्ता डॉ. जुल्फिकार आज युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा चेहरा बन गए हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित इस मुस्लिम युवा ने न केवल विवेकानंद पर पीएचडी की, बल्कि उन पर पाँच पुस्तकें लिखकर उनके संदेश को गाँव–ढाणियों तक पहुँचाने का जीवन लक्ष्य बना लिया। वे प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर युवाओं को विवेकानंद के आदर्शों, राष्ट्रनिर्माण और चरित्र निर्माण की शिक्षाओं से परिचित करा रहे हैं।
तीन विश्व रिकॉर्ड से रचा कीर्तिमान
डॉ. जुल्फिकार देश के ऐसे पहले भारतीय मुस्लिम शोधकर्ता हैं, जिनका नाम विवेकानंद केंद्रित कार्यों के लिए तीन अलग–अलग वर्ल्ड रिकॉर्ड पुस्तकों में दर्ज हुआ है—
1. लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
भारत के साथ–साथ बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर स्थित रामकृष्ण मठ–मिशन संस्थाओं पर शोध करने वाले पहले भारतीय मुस्लिम युवा के रूप में उनका नाम दर्ज किया गया।
2. यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
प्रदेशभर में 60,000 विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क वितरण और 10,000 विद्यार्थियों के बीच विवेकानंद प्रतियोगिता के सफल आयोजन पर यह सम्मान मिला।
3. भारत बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
वेलूर मठ सहित देश के 50 से अधिक रामकृष्ण मठों का भ्रमण तथा विवेकानंद पर 32 राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों के आयोजन के लिए उन्हें रिकॉर्ड में स्थान दिया गया।
यह पहल शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एक लाख युवाओं तक संदेश पहुँचाने का संकल्प
राष्ट्रीय युवा दिवस पर पिछले छह वर्षों से डॉ. जुल्फिकार एक लाख युवाओं को विवेकानंद से संबंधित कैलेंडर नि:शुल्क देने का अभियान चला रहे हैं। दिल्ली सहित राजस्थान के अलवर,जयपुर, सीकर, सीकर, चूरू, हनुमानगढ़, झुंझुनूं आदि जिलों के राजकीय–गैर राजकीय विद्यालयों, मदरसों, वेद विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अब तक 60 हजार से अधिक कैलेंडर वितरित किए जा चुके हैं। भीमसर, नूआं, सिरियासर, आबूसर, अलसीसर, मलसीसर, टमकोर समेत लगभग 35 गाँवों में वे स्वयं पहुँचकर युवाओं से संवाद करते हैं। हाथ में भगवा नहीं, किताबें होती है; जुबान पर केवल प्रेरणा। वे बताते हैं कि विवेकानंद ने शक्ति सेवा और आत्मविश्वास की जो त्रिवेणी दी,वह हर धर्म के लिए समान है। इसी भाव के साथ उन्होंने कैलेंडर वितरण शुरू किया ताकि रोज सुबह लोग विवेकानंद का चेहरा देखें और एक विचार पढ़ें।
रामकृष्ण मिशन से बचपन का जुड़ाव
डॉ. जुल्फिकार के पिता खेतड़ी स्थित एचसीएल में कार्यरत थे, वहीं से उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। स्कूली दिनों में ही वे रामकृष्ण मिशन से जुड़े और मिशन के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। इसी वातावरण ने उनके मन में विवेकानंद पर कुछ अलग करने का भाव जगाया। पीएचडी के दौरान उन्होंने देश के प्रसिद्ध बेलूर मठ और 50 से अधिक मठों का भ्रमण किया तथा सिंगापुर, श्रीलंका और बांग्लादेश के मठों में रहकर गहन अध्ययन किया।

विवेकानंद पर लिखी प्रमुख पुस्तकें
वे अब तक स्वामी विवेकानंद पर कई चर्चित पुस्तकें लिख चुके हैं, जिनमें –
- रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन
- स्वामी विवेकानंद चिंतन एवं रामकृष्ण मिशन खेतड़ी
- राजस्थान में स्वामी विवेकानंद
- रामकृष्ण मिशन बांग्लादेश (ढाका) का अध्ययन
- स्वामी विवेकानंद की कुछ प्रेरक घटनाएँ
इन पुस्तकों के माध्यम से उनका प्रयास है कि विवेकानंद की शिक्षाएँ हर धर्म और हर वर्ग के युवाओं को जोड़ सकें। डॉ. जुल्फिकार यह साबित कर रहे हैं कि महापुरुषों के विचार किसी एक धर्म की सीमा में नहीं बँधते। उनका अभियान सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण बन गया है, जिसमें एक मुस्लिम युवा विवेकानंद को अपना आदर्श मानकर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभाव को मजबूत कर रहा है।
आज से होंगे विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क वितरण
प्रदेशभर में स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं और उनके संदेश को व्यापक बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद की 163 वीं जयंती के अवसर पर राजस्थान में इस बार 10,000 युवाओं को नये वर्ष का स्वामी विवेकानंद कैलेंडर -2026 नि: शुल्क प्रदान कर विवेकानंद के संदेश को हर युवा तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है। विदित रहे गत 6 वर्षों में डाॅ. जुल्फिकार 60,000 विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क वितरित कर चुके हैं और आगे भी 1,00,000 युवाओं तक स्वामीजी के संदेश को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। 2026 का यह नये वर्ष का विवेकानंद कैलेंडर युवाओं को अपनी शक्ति पहचानने और उनको नई ऊर्जा से काम करने के लिए प्रेरित करेगा।
डाॅ. जुल्फिकार राष्ट्रीय युवा दिवस पर होंगे सम्मानित
जिले के निकटवर्ती भीमसर गांव के निवासी युवा लेखक और शोधकर्ता डॉ.जुल्फिकार को स्वामी विवेकानंद की 163 वीं जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह पर विवेकानंद आइकन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर युगपुरुष स्वामी विवेकानंद पर शोध कार्य करने वाले युवा लेखक व चिन्तक डॉ. जुल्फिकार को विवेकानंद समाज कल्याण समिति राजस्थान की ओर से विवेकानंद आइकन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह कोई पहला अवसर नहीं है जब डॉ. जुल्फिकार को सम्मानित किया गया हो। इससे पूर्व भी उन्हें देश – विदेश की कई नामी संस्थाओं द्वारा शिक्षा, समाज सेवा, विवेकानंद पर पुस्तक सर्जन और रिसर्च कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है। डाॅ जुल्फिकार ने बताया कि राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर देशभर की 28 प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।
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