अरावली हमारी जान और हिंदुस्तान की सांसें हैं, तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे : डॉ. राजकुमार शर्मा
अरावली हमारी जान और हिंदुस्तान की सांसें हैं, तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे : डॉ. राजकुमार शर्मा
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : रविन्द्र पारीक
नवलगढ़ : पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा ने केंद्र सरकार और नवलगढ़ विधायक पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अरावली पर्वतमाला हमारी जान है और हिंदुस्तान की सांसें हैं। अरावली की गोद में ही हमारा मिनी हरिद्वार लोहार्गल स्थित है। यह पर्वतमाला केवल इंसानों ही नहीं बल्कि बेजुबान जानवरों की भी रक्षा करती है। अरावली हमें ऑक्सीजन और अमूल्य जड़ी-बूटियां प्रदान करती है, ऐसे में इसके साथ छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि पहले केंद्र सरकार ने किसानों पर काले कानून थोपे और उनके फायदे गिनाए, लेकिन करीब 700 किसानों की शहादत के बाद उन कानूनों को वापस लेना पड़ा। इसी तरह अरावली के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार बैकफुट पर हैं और अंततः उन्हें जनता के दबाव में झुकना ही पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जल संसाधन बेचे गए, फिर बंदरगाह अडानी को दे दिए गए। इसके बाद आसमान बेच दिया गया और एयरपोर्ट प्राइवेट कंपनियों को सौंप दिए गए। अब जंगल और जमीन बेचने की तैयारी की जा रही है, लेकिन देश की जनता अरावली के मामले में इस तानाशाही को स्वीकार नहीं करेगी।
पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर डॉ. शर्मा ने कहा कि यह प्रक्रिया आमजन की सहूलियत के लिए होती है, लेकिन नवलगढ़ क्षेत्र में पंचायतों का बेमेल और अव्यवस्थित पुनर्गठन कर दिया गया है। नवलगढ़ में तानाशाही का माहौल है। प्रशासन को स्थानीय विधायक का पिछलग्गू बनने की आवश्यकता नहीं है। पंचायतों के इस पुनर्गठन के विरोध में शीघ्र ही एक यात्रा निकाली जाएगी।
उन्होंने विधायक विक्रम सिंह जाखल पर आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक ने एक कस्बे के लोगों को बिकाऊ बताया और बजट न देने की धमकी दी। विधायक को लगता है कि उनकी जीत के बाद ही धरती पर सब कुछ प्रकट हुआ है। डूंडलोद और जाखल को चतुर्थ श्रेणी नगरपालिका का दर्जा तो मिला, लेकिन आज तक बजट का एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ।
डॉ. शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक अधिकारियों को फोन कर धमकाते हैं और रात में गालियां देते हैं। अधिकारियों ने यहां अपना कार्यकाल भी पूरा किया है, लेकिन भ्रष्ट और तानाशाही शासन के कारण अब अधिकारी यहां काम करना नहीं चाहते।
उन्होंने कहा कि एक बार फिर गैस सिलेंडर के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। 17-18 साल पहले की तरह बुजुर्गों को गैस की लाइन में लगना पड़ रहा है। सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि नवलगढ़ के सभी परिवारों का सफाई कार्य में नंबर आना चाहिए था, जैसी व्यवस्था 15 वर्षों तक रही। लेकिन अब करोड़ों रुपये के एक साथ टेंडर निकाल दिए गए हैं, जिनके लिए आवेदन करना आम सफाई ठेकेदारों के बस की बात नहीं है।
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