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देवउठनी एकादशी से शुरू हो रहे शादी सीजन में बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रशासन रहे सतर्क – राजस्थान महिला कल्याण मंडल की अपील


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देवउठनी एकादशी से शुरू हो रहे शादी सीजन में बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रशासन रहे सतर्क – राजस्थान महिला कल्याण मंडल की अपील

देवउठनी एकादशी से शुरू हो रहे शादी सीजन में बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रशासन रहे सतर्क - राजस्थान महिला कल्याण मंडल की अपील

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : देवउठनी एकादशी से शुरू हो रहे शादी-ब्याह के सीजन में बाल विवाह रोकथाम को लेकर राजस्थान महिला कल्याण मंडल ने जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) से कड़ी निगरानी और अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।

संगठन ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर कहा है कि संभावित बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि कोई भी घटना प्रशासन की जानकारी से ओझल न रहे।
लोगों से भी अपील की गई है कि बाल विवाह की जानकारी मिलने पर पुलिस हेल्पलाइन 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या स्थानीय थाने में तुरंत सूचना दें।

राजस्थान महिला कल्याण मंडल के निदेशक राकेश जी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” (27 नवम्बर 2024) के तहत जिले में व्यापक जनजागरण चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा — “शादी के इस शुभ मुहूर्त की गरिमा तभी बनी रह सकती है जब एक भी बाल विवाह न होने दिया जाए।”

संगठन ने प्रशासन से सरपंचों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पुलिसकर्मियों और शिक्षकों को सतर्क रहने के निर्देश देने की मांग की है।
इसके साथ ही धार्मिक नेताओं से भी समाज में जागरूकता फैलाने और बाल विवाह न होने देने की अपील की गई है।

राजस्थान महिला कल्याण मंडल ने जिले में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत मंदिरों से जनजागरण की शुरुआत की है।
वृंदावन ग्राम पंचायत भारौंदा खुर्द के बांके बिहारी जी मंदिर और सूरजगढ़ के श्याम मंदिर से अभियान का आगाज किया गया, जहां पुजारी मातादीन शर्मा, विजेंद्र शर्मा, शिवकुमार शर्मा, रामनिवास शर्मा और राजेंद्र शर्मा (व्यवस्थापक, बांके बिहारी जी सेवा सदन) ने बाल विवाह को समाज का अभिशाप बताते हुए इसे रोकने का संकल्प लिया।

संगठन ने टेंट, बैंड-बाजा, सजावट आदि सेवा प्रदाताओं से भी अपील की है कि वे किसी बाल विवाह में अपनी सेवाएं न दें।
पीसीएमए 2006 के तहत बाल विवाह में किसी भी तरह की भागीदारी या सहयोग करने पर दो साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

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