सेवारत चिकित्सक मेडिकल कॉलेज में पढ़ा सेकेंगे:झुंझुनूं के मेडिकल काॅलेज में दूर होगी फैकल्टी की कमी, स्टूडेंट को मिलेगी सुविधा
सेवारत चिकित्सक मेडिकल कॉलेज में पढ़ा सेकेंगे:झुंझुनूं के मेडिकल काॅलेज में दूर होगी फैकल्टी की कमी, स्टूडेंट को मिलेगी सुविधा

झुंझुनूं : राजस्थान सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने सेवारत चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने का निर्णय लिया है।
चिकित्सक संघ अरिसदा (ARISDA) ने इस पहल का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद दिया। चिकित्सकों ने इसे मेडिकल विद्यार्थियों और मरीजों दोनों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।
फैकल्टी संकट और समाधान
राजस्थान के कई मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की गंभीर कमी है। इससे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मान्यता रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने राजस्थान चिकित्सा शिक्षा नियम 1962 में संशोधन किया है, जिसके तहत सेवारत चिकित्सक अब शिक्षण कार्यों में शामिल हो सकेंगे।
अनुभव बनेगा वरदान
अरिसदा अध्यक्ष डॉ. एस.ए. जब्बार ने कहा कि सेवारत चिकित्सकों का अनुभव और योग्यता मरीजों व विद्यार्थियों दोनों के लिए लाभकारी होगी। उन्होंने इस कदम को “रोगी हित और विद्यार्थी हित का संगम” बताया।संघ के प्रवक्ता डॉ. विजय झाझड़िया ने प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में लगभग हर जिले में मेडिकल कॉलेज खुलना आम जनता के लिए बड़ी राहत है। उन्होंने टेक-2025 गाइडलाइंस के तहत इस पहल को सराहनीय बताया।
सरकार पर नहीं पड़ेगा बोझ
अरिसदा महासचिव डॉ. राजेंद्र ढाका ने कहा कि सेवारत चिकित्सकों के समायोजन से नई भर्ती की जरूरत नहीं होगी। इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा। उन्होंने इसे “संजीवनी बूटी” बताते हुए कहा कि चिकित्सकों का लंबा अनुभव और आम लोगों से जुड़ाव पूरे प्रदेश के लिए लाभकारी होगा।
फैक्ट फाइल: एक नजर में
- राजस्थान में मेडिकल कॉलेज: 30
- सेवारत चिकित्सक (राज्यभर में): 19,000
- झुंझुनूं बीडीके अस्पताल में चिकित्सक: 75
- पूरे झुंझुनूं जिले में चिकित्सक: 400 से अधिक
100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज में आवश्यक फैकल्टी:
- आचार्य: 15
- सह आचार्य: 20
- सहायक आचार्य: 18
- सीनियर रेजिडेंट: 65
- ट्यूटर/डेमोंस्ट्रेटर: 45