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बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक जारी:कहा- अवमानना करने वालों से मुआवजा वसूलेंगे; भारत धर्मनिरपेक्ष, हमारी गाइडलाइन सबके लिए होगी


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बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक जारी:कहा- अवमानना करने वालों से मुआवजा वसूलेंगे; भारत धर्मनिरपेक्ष, हमारी गाइडलाइन सबके लिए होगी

बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक जारी:कहा- अवमानना करने वालों से मुआवजा वसूलेंगे; भारत धर्मनिरपेक्ष, हमारी गाइडलाइन सबके लिए होगी

नई दिल्ली : बुलडोजर एक्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि फैसला आने तक देशभर में बुलडोजर एक्शन पर रोक जारी रहेगी।

बेंच ने यह भी कहा- कोर्ट के आदेश की अवमानना करने वालों पर एक्शन होगा। साथ ही पीड़ितों की संपत्ति वापस की जाएगी, जिसका मुआवजा भी दोषी अधिकारियों से वसूला जाएगा।

सुनवाई सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार का पक्ष रखा। साथ ही कहा कि एक समुदाय विशेष के खिलाफ बुलडोजर एक्शन किए जाने के आरोप लगे हैं।

इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं। हम जो भी निर्धारित कर रहे हैं वह पूरे देश के लिए होगा। चाहे वह मंदिर हो या दरगाह, उसे हटाना ही सही होगा, क्योंकि सार्वजनिक सुरक्षा सबसे पहले है।

दो दिन में अवमानना की दो याचिकाएं
  1. सोमवार को असम के सोनापुर में बुलडोजर एक्शन के खिलाफ 47 रहवासियों ने जानबूझकर आदेश का उल्लंघन करने के खिलाफ याचिका लगाई। कोर्ट ने असम सरकार के अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
  2. मंगलवार को पाटनी मुस्लिम ट्रस्ट ने अवमानना याचिका दायर की। आरोप है कि गुजरात के अधिकारियों ने अवैध तरीके से मुस्लिम धार्मिक और आवासीय स्थल तोड़े, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

पढ़िए बुलडोजर एक्शन पर कोर्ट रूम LIVE

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता– मैं उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश की ओर से पेश हुआ हूं। लेकिन बेंच ने कहा है कि गाइडलाइन पूरे देश के लिए होगी इसलिए मेरे कुछ सुझाव हैं। बहुत सारी चीजों पर ध्यान दिया गया है। अगर कोई आदमी किसी अपराध में दोषी है तो यह बुलडोजर एक्शन का आधार नहीं है।

जस्टिस गवई- अगर वो दोषी है, तो क्या यह बुलडोजर एक्शन का आधार हो सकता है?

सॉलिसिटर जनरल- नहीं। आपने कहा था कि नोटिस इश्यू किया जाना चाहिए। ज्यादातर म्युनिसिपल कानूनों में केस के हिसाब से नोटिस जारी करने की व्यवस्था होती है। आप देख सकते हैं कि नोटिस रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए भेजा गया है। नोटिस में जिक्र होना चाहिए कि किस कानून का उल्लंघन किया गया है।

जस्टिस गवई- हां एक राज्य में भी अलग-अलग कानून हो सकते हैं।

जस्टिस विश्वनाथन- इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल होना चाहिए। इसे डिजिटलाइज कीजिए। अफसर भी सेफ रहेगा। नोटिस भेजने और सर्विस की स्थिति भी पोर्टल पर रहेगी।

सॉलिसिटर जनरल- एक चीज मुझे परेशान कर रही है, आरोप लग रहे हैं कि एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

जस्टिस गवई- हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, हम जो भी गाइडलाइन बनाएंगे वह पूरे देश के लिए होगी।

जब SG ने कहा- इंटरनेशनल एजेंसी की मदद नहीं चाहिए सुनवाई के दौरान यूनाइटेड नेशन की तरफ से सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की। इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि हम अभी पर्याप्त घरों की समस्या पर विचार नहीं कर रहे हैं। हमारी परेशानी अभी सिर्फ अवैध निर्माण हैं। इस पर बाद में विचार करेंगे।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमें इंटरनेशनल एजेंसी की मदद नहीं चाहिए। एडवोकेट सिंह ने कहा- हम घरों के बड़े मसले को नहीं देख रहे हैं, हम सिर्फ छोटे मुद्दे को देख रहे हैं।

सॉलिसिटर जनरल- अवैध अतिक्रमण के मामले में कुछ कानून हैं…

जस्टिस गवई- हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पब्लिक रोड, वाटर बॉडीज, रेलवे लाइन, चाहे मंदिर हो या दरगाह, अवैध अतिक्रमण को हटाया जाएगा। जनता की सुरक्षा सबसे आगे है।

जस्टिस विश्वनाथन- अगर 2 स्ट्रक्चर हैं और आप केवल एक के खिलाफ एक्शन लेते हैं। आपको एक मामले में क्रिमिनल बैकग्राउंड मिलता है। इसके लिए कुछ तो उपाय ढूंढना पड़ेगा।

सॉलिसिटर जनरल- आप ऐसे मामलों को छोड़ दीजिए जिन्हें मीडिया में बढ़ाचढ़ाकर बताया गया है। अदालत इस समय जनरल गाइडलाइन पर विचार कर रही है।

जस्टिस गवई मुस्कुराते हुए बोले- बुलडोजर जस्टिस सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई ने कहा कि फैसला लिखते समय हम यह साफ कर देंगे कि अगर कोई महज आरोपी या दोषी है तो बुलडोजर एक्शन नहीं लिया जा सकता। जब मैं बॉम्बे में था, तब मैंने खुद एक फुटपाथ पर अवैध अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। हम अदालतों को यह निर्देश देंगे कि जब अवैध अतिक्रमण के मामले में सुनवाई कर रहे हों तो ध्यान रखें। इस पर SG ने उन्हें बताया कि ऐसे सिर्फ 2% मामले हैं।

जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा कि यह सिर्फ कुछ या 2% मामलों की बात नहीं है। तोड़फोड़ की कार्रवाई वाले मामले 4.5 लाख के करीब हैं। पिछले कुछ समय से यह आंकड़ा बना हुआ है। इस पर SG बोले- जब मैंने कहा कि 2% तो मेरा मतलब बुलडोजर एक्शन का महज 2%। तत्काल न्याय की बात हम न्यूज पेपर्स में पढ़ते हैं। इस पर जस्टिस गवई ने मुस्कुराते हुए बुलडोजर जस्टिस शब्द बोला।

सॉलिसिटर जनरल- कोर्ट ने एमसी मेहता के केस में 48 घंटे के नोटिस की बात कही थी।

जस्टिस विश्वनाथन- हम ऑनलाइन व्यवस्था सिर्फ रिकॉर्ड के लिए कह रहे हैं।

सॉलिसिटर जनरल- बिल्कुल ठीक। नोटिस सिर्फ रजिस्टर्ड डाक से भेजना चाहिए। मैं सिर्फ दुरूपयोग को लेकर परेशान हूं। अतिक्रमण करने वालों को 1 हफ्ते का समय मिल जाएगा।

जस्टिस विश्वनाथन- कई केस आते हैं, जिनमें नोटिस को चैलेंज किया जाता है। सही जगह से डिमोलिशन के ऑर्डर दिए जाने चाहिए। नोटिस के मामले को कोर्ट को नहीं देखना चाहिए, सिर्फ बुलडोजर की कार्रवाई पर नजर रखनी है।

जस्टिस गवई- ऑर्डर पास होने के बाद उन्हें 10-15 दिन बचा सकते हैं। कोर्ट में मामला चलता है तो भी 1 महीने के भीतर फैसला हो जाता है।

सॉलिसिटर जनरल- क्या ऐसे में लोकल कानूनों में बदलाव की जरूरत नहीं है?

जस्टिस विश्वनाथन- अगर यह अवैध भी है तो भी यह देखना अच्छी बात नहीं है कि महिलाएं और बच्चे सड़क पर हैं। बूढ़े सड़क पर आ गए हैं। हो सकता है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हों।

सॉलिसिटर जनरल- मुझे इस पर ऐतराज है। आप सहूलियत देने की बात कर रहे हैं, जो कि कानून में कोई शर्त नहीं है।

जस्टिस गवई- हम सिर्फ उस कानूनी सहूलियत की बात कर रहे हैं जो पहले से ही हैं। हम पब्लिक प्रॉपर्टी पर अवैध अतिक्रमण की बात नहीं कर रहे हैं।

बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट में पिछली 3 सुनवाई में क्या हुआ 

मैं साफ कर दूं कि अगली तारीख तक हमारी इजाजत के बिना कोई भी तोड़-फोड़ नहीं होनी चाहिए। इस आदेश में सड़कें, रेलवे लाइंस, सरकारी फुटपाथ के अवैध अतिक्रमण शामिल नहीं है। ~ सुप्रीम कोर्ट

परिवार के किसी सदस्य ने अपराध किया है, तो उसके परिवार या घर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है। ~ बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट

तीन राज्य जहां पिछले 3 महीने में बुलडोजर एक्शन हुआ

  • अगस्त 2024 : मध्यप्रदेश के छतरपुर में पुलिस पर पथराव के आरोपी पर एक्शन

मध्यप्रदेश के छतरपुर में 21 अगस्त को कोतवाली थाने पर पथराव के 24 घंटे के भीतर सरकार ने यहां 20 हजार स्क्वायर फीट में बनी 20 करोड़ रुपए की तीन मंजिला हवेली को जमींदोज कर दिया था। जब उनकी हवेली गिराई जा रही थी, तब भी उनके परिवार का कोई सदस्य यहां मौजूद नहीं था। FIR के मुताबिक, चारों भाइयों ने भीड़ को पुलिस पर हमला करने के लिए उकसाया था।

  • अगस्त 2024 : राजस्थान के उदयपुर में चाकूबाजी के बाद आरोपी के घर चला बुलडोजर

उदयपुर के एक सरकारी स्कूल में 10वीं में पढ़ने वाले एक बच्चे ने दूसरे को चाकू मारकर घायल कर दिया था। इसके बाद पूरे शहर में आगजनी और हिंसक प्रदर्शन हुए। 17 अगस्त को आरोपी छात्र के घर पर बुलडोजर एक्शन हुआ था। इससे पहले सरकार के निर्देश पर वन विभाग ने आरोपी के पिता सलीम शेख को अवैध बस्ती में बने मकान को खाली करने का नोटिस दिया था।

राजस्थान के उदयपुर में 17 अगस्त को चाकूबाजी के आरोपी के पिता सलीम के घर पर बुलडोजर एक्शन हुआ था।
राजस्थान के उदयपुर में 17 अगस्त को चाकूबाजी के आरोपी के पिता सलीम के घर पर बुलडोजर एक्शन हुआ था।
  • जून 2024 : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बलिया में 2 आरोपियों की 6 संपत्तियां तोड़ीं

मुरादाबाद में विवाहिता के अपहरण की कोशिश करने वाले के घर पर बुलडोजर चला था। आरोपी ने अपहरण का विरोध कर रहे महिला के मां-बाप और भाई को गोली मार दी थी। वहीं, बरेली में रोटी के विवाद में युवक की पीट-पीटकर हत्या करने वाले होटल मालिक जीशान का होटल जमींदोज कर दिया गया। सनी का 26 जून को बर्थडे था। सनी ने मशाल होटल के मालिक जीशान को 150 रोटी का आर्डर दिया था। जीशान ने सिर्फ 50 रोटी दी और 100 रोटी देने से मना कर दिया था। विवाद बढ़ा तो जीशान ने अपने साथियों के साथ मिलकर सनी की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

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