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पंचायत चुनाव में झुंझुनूं की बेटियों ने दूसरे जिलों में भी लहराया जीत का परचम


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पंचायत चुनाव में झुंझुनूं की बेटियों ने दूसरे जिलों में भी लहराया जीत का परचम

कोई पहली तो कोई दूसरी बार बनी सरपंच, सीकर और कोटपूतली में बनाई राजनीतिक पहचान; पिलानी की 26 ग्राम पंचायतों में 1,614 मत निरस्त, कई जगह जीत के अंतर से अधिक रहे अवैध मत

झुंझुनूं : पंचायतीराज चुनाव में झुंझुनूं जिले की बेटियों और बहुओं ने दूसरे जिलों में भी अपनी राजनीतिक पहचान बनाई है। जिले के अलग-अलग गांवों से ससुराल गई महिलाओं ने सीकर और कोटपूतली क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सरपंच पद पर जीत हासिल कर नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। वहीं, जिले की किठाना ग्राम पंचायत में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के भतीजे की बहू सुभीता धनखड़ ने लगातार दूसरी बार सरपंच बनकर जीत दर्ज की। इन जीतों के बाद कहीं पीहर में खुशियां मनाई गईं तो कहीं ग्रामीणों ने नवनिर्वाचित सरपंचों का स्वागत किया।

दूसरी ओर, पिलानी पंचायत समिति क्षेत्र की 26 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के चुनाव के दौरान 1,614 मतपत्र निरस्त होने का मामला भी चर्चा में है। कई ग्राम पंचायतों में निरस्त मतों की संख्या जीत के अंतर से अधिक रही। इससे एक बार फिर पंचायत चुनाव में प्रत्येक मत की अहमियत सामने आई है।

सुभीता धनखड़ लगातार दूसरी बार बनीं सरपंच

सुलताना क्षेत्र की किठाना ग्राम पंचायत में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के भतीजे की बहू सुभीता धनखड़ ने लगातार दूसरी बार सरपंच पद पर जीत हासिल की है। उनकी लगातार दूसरी जीत के बाद गांव में उत्साह का माहौल रहा। ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। दूसरी बार जीत दर्ज करना उनके प्रति ग्रामीणों के समर्थन और भरोसे को बरकरार रखने के रूप में देखा जा रहा है।

टीबा बसई की बेटी बनी कोटपूतली की सरपंच

खेतड़ी उपखंड के टीबा बसई गांव की बेटी रीना देवी पुत्री जयदयाल ढीकवाल ने कोटपूतली पंचायत समिति की हांसियावास ग्राम पंचायत में सरपंच पद पर जीत दर्ज की। रीना देवी के भाई विक्रम ढीकवाल ने बताया कि जीत की सूचना मिलते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। छोटे से परिवार से निकलकर सरपंच पद तक पहुंची रीना की सफलता को ग्रामीण परिवार और क्षेत्र के लिए गौरव की बात मान रहे हैं।

पचलंगी की बेटी ने सीकर में हासिल की जीत

पचलंगी के तेजाजी नगर स्थित ढाणी स्वामी वाला निवासी अनीता बड़सरा ने सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र की समर्थपुरा सुजाना ग्राम पंचायत से सरपंच का चुनाव जीत लिया। शुक्रवार को घोषित परिणाम में अनीता ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 334 मतों से पराजित किया। उनकी जीत की खबर मिलते ही पीहर पचलंगी के तेजाजी नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। अनीता के पिता गुलझारी लाल बड़सरा सेना से सेवानिवृत्त हैं।

पिलानी में 1,614 मतपत्र निरस्त, कई जगह जीत के अंतर से ज्यादा अवैध मत

पंचायत चुनाव में एक-एक वोट की अहमियत पिलानी पंचायत समिति क्षेत्र के परिणामों में भी सामने आई है। क्षेत्र की 26 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए हुए चुनाव में बड़ी संख्या में मतपत्र निरस्त हुए। शुक्रवार देर रात हुई मतगणना में कुल 1,614 मत अवैध घोषित किए गए। यह कुल पड़े मतों का करीब 2.22 प्रतिशत है। कई ग्राम पंचायतों में निरस्त मतों की संख्या जीत के अंतर के बराबर या उससे अधिक रही।

हालांकि, निरस्त मतों के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि चुनाव परिणाम बदल जाते, लेकिन कम अंतर से हार-जीत वाले मुकाबलों में इनकी संख्या ने चर्चा जरूर बढ़ा दी है। मतदान के दौरान निर्धारित तरीके से मुहर नहीं लगाने, एक से अधिक स्थानों पर निशान लगाने अथवा मतपत्र पर गलत तरीके से मतदान करने जैसी चूक से मत निरस्त हो सकते हैं। मतपत्र से मतदान की प्रक्रिया में छोटी-सी गलती भी वोट को अवैध बना सकती है।

बैलेट पेपर से मतदान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मतदान मशीन से होता तो क्या निरस्त मतों की संख्या कम रहती? मशीन आधारित मतदान में मतपत्र पर गलत जगह मुहर लगाने जैसी गलती की गुंजाइश नहीं रहती, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी निरस्त मत बच जाते या चुनाव परिणाम बदल जाते।

कहीं जीत का अंतर कम तो कहीं निरस्त मतों की संख्या ज्यादा

पिलानी पंचायत समिति क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों के आंकड़े खास ध्यान खींचते हैं। देवरोड़ में 142 मत निरस्त हुए, जबकि जीत का अंतर 144 मतों का रहा। पीपली में 49 मत निरस्त हुए, जबकि जीत का अंतर केवल 14 वोट रहा। झेरली में 103 मत अवैध घोषित किए गए, जबकि जीत का अंतर 70 मतों का था। इसी तरह जखोड़ा में 104 मत निरस्त हुए, जबकि जीत का अंतर 52 वोट रहा। तिगियास ग्राम पंचायत में भी 71 मत निरस्त किए गए, जबकि जीत का अंतर 59 वोटों का रहा। बजावा और दूदवा में भी निरस्त मतों को लेकर चर्चा है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई पंचायतों में निरस्त मतों की संख्या जीत के अंतर से अधिक रही। हालांकि, निरस्त मत किस प्रत्याशी के पक्ष में पड़ सकते थे, इसका अनुमान लगाना संभव नहीं है।

72 हजार से अधिक मतदाताओं ने किया मतदान

पिलानी पंचायत समिति क्षेत्र में कुल 88,089 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 72,552 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस प्रकार कुल पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 82.36 प्रतिशत ने मतदान किया। मतदान करने वालों में से 1,614 मत निरस्त हुए, जो कुल पड़े मतों का करीब 2.22 प्रतिशत है। वहीं, कुल पंजीकृत मतदाताओं के मुकाबले निरस्त मतों का अनुपात करीब 1.83 प्रतिशत रहा।

प्रतिशत के लिहाज से निरस्त मतों की संख्या कम दिखाई दे सकती है, लेकिन पंचायत चुनाव में जहां प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर कुछ दर्जन मतों तक सिमट जाता है, वहां प्रत्येक मत की अहमियत बढ़ जाती है। यही वजह है कि मतगणना के बाद पिलानी क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में निरस्त मतों और जीत के अंतर की तुलना चर्चा का विषय बनी हुई है।

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