सीकर मास्टर प्लान 2041 निरस्त करने पर डोटासरा ने उठाए सवाल, सरकार से मांगा जवाब
एमएनआईटी को दिए गए साढ़े चार से पांच करोड़ रुपये के भुगतान पर उठाए सवाल, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और नए मास्टर प्लान की समयसीमा तय करने की मांग
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : नैना शेखावत
सीकर : सीकर के मास्टर प्लान 2041 को निरस्त किए जाने के फैसले पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष एवं लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार से मास्टर प्लान निरस्त करने के कारण सार्वजनिक करने और योजना तैयार करने में खर्च हुई राशि की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। डोटासरा ने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि मास्टर प्लान में ऐसी क्या खामियां थीं, जिनके चलते इसे निरस्त करने का निर्णय लिया गया। यदि इसमें तकनीकी त्रुटियां, वित्तीय अनियमितताएं या किसी अधिकारी, नेता अथवा भूमाफिया की संलिप्तता सामने आई है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
डोटासरा ने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करने के लिए एमएनआईटी को करीब साढ़े चार से पांच करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में योजना निरस्त होने के बाद सरकार को बताना चाहिए कि खर्च की गई राशि का क्या उपयोग हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। साथ ही नए मास्टर प्लान को तैयार करने की समयसीमा भी तय की जानी चाहिए।
25 अगस्त 2025 को प्रकाशित हुआ था प्रारूप
डोटासरा के अनुसार, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सीकर का मास्टर प्लान तैयार कर अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद भाजपा सरकार में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने 25 अगस्त 2025 को मास्टर प्लान 2041 का प्रारूप प्रकाशित किया था। उस समय सरकार की ओर से कानूनी और तकनीकी परीक्षण की बात कही गई थी तथा आमजन से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।
डोटासरा ने दावा किया कि प्रारूप के प्रकाशन के बाद करीब पांच हजार आपत्तियां प्राप्त हुईं, लेकिन उनके निस्तारण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद मास्टर प्लान निरस्त करने का निर्णय ले लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि योजना में खामियां थीं, तो सरकार को उनका विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही यह भी बताना चाहिए कि आपत्तियों के आधार पर संशोधन की संभावनाओं पर विचार क्यों नहीं किया गया।
38 गांवों के विकास पर असर पड़ने की आशंका
डोटासरा ने कहा कि मास्टर प्लान में शामिल 38 गांवों के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्र के नियमों के तहत विकास और शहरी नियोजन की नई व्यवस्था को लेकर असमंजस बना हुआ है। इससे किसानों, आम नागरिकों और क्षेत्र के विकास पर असर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि यदि पुराने मास्टर प्लान में कुछ त्रुटियां थीं, तो आपत्तियों का निस्तारण कर आवश्यक संशोधन किए जा सकते थे। इससे आमजन को राहत मिलती और सीकर के विकास की प्रक्रिया भी आगे बढ़ती। उन्होंने आशंका जताई कि नए सिरे से योजना तैयार करने में देरी हो सकती है और विवाद बढ़ने पर मामला न्यायालय तक भी पहुंच सकता है।
यूआईटी के बजट पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने नए मास्टर प्लान की जिम्मेदारी नगर विकास न्यास (यूआईटी) को दिए जाने की चर्चा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि यूआईटी के पास पर्याप्त बजट और संसाधन नहीं हैं, तो वह यह काम कैसे पूरा करेगी? उन्होंने सुझाव दिया कि एमएनआईटी की ओर से पहले तैयार किए गए विस्तृत आंकड़ों और दस्तावेजों का उपयोग कर संशोधित योजना तैयार करने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। इससे दोबारा समय, श्रम और सरकारी धन खर्च होने से बचाया जा सकता है।
डोटासरा ने सवाल किया कि पहले खर्च की गई राशि का उपयोग नहीं होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी और सरकारी धन की उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
अधिकारियों के साथ प्रेस वार्ता कर जवाब दे सरकार
डोटासरा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय, नगरीय विकास विभाग के सचिव और स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर मास्टर प्लान निरस्त करने के कारण स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से संबंधित अधिकारियों के साथ प्रेस वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी लिखित रूप में सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी, एजेंसी या अन्य व्यक्ति की गलती के कारण मास्टर प्लान निरस्त करना पड़ा है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर वसूली की प्रक्रिया भी अपनाई जानी चाहिए।
डोटासरा ने कहा कि यह किसी व्यक्ति के अहंकार का विषय नहीं, बल्कि सीकर के विकास से जुड़ा मामला है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि मास्टर प्लान में क्या कमियां थीं, उन्हें दूर करने के लिए क्या प्रयास किए गए और नया मास्टर प्लान कब तक तैयार होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पारदर्शिता बरतते हुए जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गोविंद पटेल भी मौजूद रहे।
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