सादगी से हुआ डॉ. सिमरन और डॉ. समीर का निकाह, दहेज नहीं लिया; बच्चियों की शिक्षा के लिए दिए 42 हजार रुपए
चूरू में दोनों परिवारों ने बिना घोड़ी, बाजा और आतिशबाजी के संपन्न किया विवाह समारोह, इकरा फाउंडेशन की मुहिम को सराहा
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : समाज में सादगीपूर्ण विवाह और फिजूलखर्ची से बचने की मिसाल पेश करते हुए चूरू में 19 अक्टूबर 2026 को डॉ. सिमरन खान मुनियांन और डॉ. समीर खान पहाड़ियांन का निकाह संपन्न हुआ। इकरा फाउंडेशन के आजीवन सदस्य निजाम खान मुनियांन की बेटी डॉ. सिमरन और फाउंडेशन के आजीवन सदस्य मुबारक खान पहाड़ियांन के बेटे डॉ. समीर ने सादगी के साथ नए जीवन की शुरुआत की।
दोनों परिवार सक्षम होने के बावजूद विवाह में किसी तरह का दिखावा नहीं किया गया। वर पक्ष की ओर से घोड़ी, बाजा, ध्वनि विस्तारक यंत्र और आतिशबाजी जैसी परंपराओं से परहेज किया गया। परिवारों के अनुसार, विवाह में न दहेज लिया गया और न ही रुपये या नारियल जैसी कोई रस्म निभाई गई।
बारात के पहुंचने पर दादाबाड़ी मैरिज गार्डन के स्वच्छ और सुंदर सभागार में शहर काजी हाजी मौलाना अहमद अली शाह ने निकाह संपन्न करवाया। नवदंपती को आशीर्वाद देने के लिए चूरू विधायक हरलाल सहारण, नगर परिषद सभापति विनय कुमार गोयनका, रियाजत खान, बन्ने खान घांघू, ओमप्रकाश सारस्वत, डॉ. इकराम अली, डॉ. आरिफ खान, डॉ. एफ.एच. गौरी, डॉ. इमरान खान, डॉ. अमजद खान, डॉ. एन. आर्य, भागीरथ शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इकरा फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी गुलाम मोहम्मद खान, पूर्व अध्यक्ष हाजी शमशाद खान जाबासर, उपाध्यक्ष मोहम्मद अयूब खान, सचिव मजीद खान, शौकत अली खान किरडोली, संयोजक जाबीर खान कीरडोली, मार्गदर्शक शौकत अली खान दारिया, प्रधानाचार्य मोहम्मद आरिफ खान एलमान, यूनुस खान भाईखानी, मोहम्मद रशीद खान मोरल, हाजी याकूब थीम और करामात अली खान सहित अन्य सदस्यों ने सादगीपूर्ण विवाह की सराहना की। उन्होंने इसे समाज के लिए सकारात्मक पहल बताया।
बच्चियों की शिक्षा के लिए दिए 42 हजार रुपए
इकरा फाउंडेशन की ओर से बच्चियों की शिक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए दूल्हा और दुल्हन, दोनों पक्षों ने फाउंडेशन को 21-21 हजार रुपए की सहायता राशि दी। इस तरह कुल 42 हजार रुपए बच्चियों की शिक्षा के लिए प्रदान किए गए। समाज के लोगों ने दोनों परिवारों की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने विवाह में अनावश्यक खर्च से बचने के साथ ही बच्चियों के भविष्य को बेहतर बनाने में भी योगदान दिया।
दोनों परिवार समाजसेवा के कार्यों में बिना किसी दिखावे के सहयोग करते रहे हैं। मास्टर निजाम खान, सेवानिवृत्त अतिरिक्त आयुक्त शौकत अली खान झारिया के छोटे भाई हैं। वे मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के कारण विभिन्न समाजों में अच्छी पहचान रखते हैं।
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